कोहरा हटा, न्यूनतम तापमान गिरा; फसलों पर पाले का खतरा:IGNP रेगुलेशन पर बैठक, किसानों को कम पानी मिलने की आशंका

हनुमानगढ़। क्षेत्र में कोहरा हटने और न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट के कारण फसलों पर पाले का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच, इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के रेगुलेशन को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि 30 दिसंबर को प्रस्तावित जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में नहर रेगुलेशन की समीक्षा की जाएगी। मौसम विभाग के अनुसार, यदि तापमान और गिरता है तो पाले की स्थिति बन सकती है। इसका सीधा असर सरसों और गेहूं जैसी रबी फसलों पर पड़ने की आशंका है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वर्तमान में, सिंचाई विभाग ने 5 जनवरी तक के लिए रेगुलेशन तय किया है, जिसके तहत चार में से दो समूह चलाकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, चर्चा है कि आगामी बैठक में रेगुलेशन में बदलाव कर तीन में से केवल एक समूह को पानी देने का निर्णय लिया जा सकता है। रेगुलेशन में संभावित बदलाव से आईजीएनपी के द्वितीय चरण के किसानों में भारी रोष है। किसान पहले ही सिंचाई पानी कम होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं। यदि रेगुलेशन बदलता है, तो द्वितीय चरण के साथ-साथ प्रथम चरण की फसलों को भी नुकसान होने की आशंका है। दिसंबर माह में बांधों के कैचमेंट एरिया में बारिश न होने के कारण पानी की आवक कम और निकासी अधिक बनी हुई है। इसी वजह से चार में से दो समूह की बजाय तीन में से एक समूह चलाने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह बदलाव होता है, तो किसानों को 17 दिन के बजाय लगभग 25 दिन के अंतराल पर सिंचाई पानी मिलेगा। कम पानी और पाले की दोहरी मार से रबी फसलों के उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में सरसों और गेहूं की हल्की सिंचाई पाले से बचाव में प्रभावी होती है। हालांकि, सूखे वर्ष की स्थिति के कारण पानी की आवक कम है, जिससे रेगुलेशन में बदलाव लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में किसानों की उम्मीदें अब मौसम पर टिकी हैं। बांधों के कैचमेंट एरिया में बारिश या हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर में मावठ होने पर ही स्थिति में सुधार की संभावना है।

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