भोपाल में एयरपोर्ट रोड की पॉश कॉलोनी सूरज नगर में एडवोकेट के घर चोरी की वारदात के दो दिन बाद भी पुलिस आरोपियों का सुराग नहीं जुटा सकी है। केस की जांच के लिए क्राइम ब्रांच, कोहेफिजा और शाहजहांनाबाद थाने की तीन टीमें जुटी हैं। पुलिस आरोपियों के कॉलोनी तक आने और जाने के रास्तों का रोड मैप तैयार कर रही है। कोहेफिजा थाना टीआई केजी शुक्ला के मुताबिक दोनों थानों की टीमें घटना स्थल के आस पास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही हैं। कुछ संदेहियों की तस्वीरों में दिख रहे हुलिया के आधार पर तलाश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक आरोपियों ने सीनियर एडवोकेट अखिलेश श्रीवास्तव के घर को निशाना बनाया। वकील के घर दो खतरनाक कुत्ते हैं, ऐसे में बदमाशों ने पहले उन्हें कुछ खाने को दिया। कुत्तों ने भौंकना बंद किया तो हथियारों और औजारों से लैस नकाबपोश 8 नकाबपोश दीवार एवं गेट फांदकर घर में घुसे और अंदर कमरों के ताले तोड़कर करीब 18 लाख रुपए नगद और लाखों रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवरात लेकर फरार हो गए। बदमाश लोडिंग वाहन से आए थे। घटना 25 और 26 दिसंबर की दरम्यानी रात की है। श्रीवास्तव के मुताबिक वह इलाज के लिए परिवार के साथ इंदौर गए थे। बदमाशों ने इसी का फायदा उठाया। रैकी कर पूरी वारदात, सुबह मेड आई तो खुलासा हुआ वारदात के तरीके से साफ है कि बदमाशों ने पहले रैकी की। उन्हें सब कुछ मालूम था, इसीलिए कुत्तों के लिए खाना और सामान बटोरने के लिए लोडिंग वाहन लाए थे। पुलिस की गश्त नहीं थी, इसलिए रात करीब 1.15 से 3:45 तक बदमाश घर के आसपास घूमते रहे। वकील का कहना है कि 26 दिसंबर की सुबह काम वाली मेड घर आई तो उसने दरवाजा टूटा देखकर फोन पर जानकारी दी। इसके बाद वह इंदौर से आए तो देखा घर का सामान बिखरा पड़ा था। अलमारियों से नगदी और जेवर गायब थे। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। कोहेफिजा पुलिस ने नकबजनी का केस दर्ज किया है। पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा का कहना है कि आरोपियों का सुराग लगाया जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज से बदमाशों का पता लगाया जा रहा है। जल्द गिरफ्तारी होगी। कोई बात नहीं, इशारों में वारदात
श्रीवास्तव ने घर की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए वाइस रिकार्डिंग वाले हाई क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे लगा रहे हैं। कैमरों की नजर में मुख्य सड़क, मेन गेट, पोर्च आदि हिस्सा कवर होता है। इसमें सारी वारदात भी कैद हुई है। बदमाश अपने साथ एक इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स ले गए हैं। संभवत: वह इसे डीवीआर समझ रहे हैं। वारदात के दौरान बदमाशों ने किसी का नाम नहीं लिया। इशारों में ही पूरी वारदात को अंजाम दिया।


