रेत के धोरों की इस नगरी में इन दिनों हालात ऐसे हैं कि जैसलमेर संभाले नहीं संभल रहा। सम के धोरों से लेकर किले की गलियों तक सैलानियों का ऐसा रेला उमड़ा है कि होटल फुल हैं, सड़कें भरी हैं। इतनी भीड़ के बीच भी जैसलमेर का जादू कम नहीं पड़ा। धोरों की ठंडी हवा, लोक संगीत की गूंज और सुनहरी शामें बता रही हैं कि स्वर्णनगरी अब सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि राजस्थान का सबसे हॉट टूरिज्म ब्रांड बन चुकी है। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर 10 का सबसे बड़ा टूरिज्म बूम देख रहा है। रेगिस्तान से लेकर शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल पूरी तरह हाउसफुल चल रहे हैं। माना जा रहा है कि यह रश 10 जनवरी तक बना रहेगा, जिससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग खासे उत्साहित हैं। 90% होटल बुक, स्थानीय इकोनॉमी को मिला ‘बूस्टर डोज’ होटल प्रिया ग्रुप के मयंक भाटिया बताते हैं कि नए साल के जश्न के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में सैलानी जैसलमेर पहुंच रहे हैं। होटल और रिसोर्ट्स में 90 प्रतिशत से ज्यादा ऑक्यूपेंसी इस बात का संकेत है कि जैसलमेर अब सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया के प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। लग्जरी होटलों से लेकर छोटे होम-स्टे तक इस सीजन में रिकॉर्ड कारोबार देखने को मिल रहा है। पर्यटन से जुड़े हस्तशिल्प विक्रेता, लोक कलाकार, टूर गाइड, कैब ऑपरेटर और ऊंट सफारी संचालकों के चेहरे खिले हुए हैं। ‘प्रीमियम डेस्टिनेशन’ के तौर पर उभरा जैसलमेर ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल्स पर होटलों के बढ़ते दाम यह साबित कर रहे हैं कि सैलानी जैसलमेर के अनुभव और विरासत के लिए बड़ी कीमत चुकाने को तैयार हैं। द सराय, मैरियट और सूर्यागढ़ जैसे लग्जरी ब्रांड्स में जबरदस्त डिमांड के चलते जैसलमेर अब ‘प्रीमियम वेडिंग और हॉलिडे डेस्टिनेशन’ के रूप में उभरकर सामने आया है। पर्यटन से जुड़े इस उछाल ने स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खोले हैं। जैसलमेर में 4 हजार रुपए से लेकर 2 लाख रुपए तक के कमरे उपलब्ध हैं, जिन्हें आम सैलानी से लेकर खास मेहमान तक पहले से बुक कराकर यहां पहुंच रहे हैं। यह संकेत जैसलमेर पर्यटन के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। सम के धोरों पर उत्सव, दिखा ‘मिनी भारत’ का नजारा इन दिनों जैसलमेर की सड़कों पर दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा नंबर की गाड़ियों की कतारें नजर आ रही हैं। ऐसा लगता है मानो पूरा भारत स्वर्णनगरी में सिमट आया हो। डेजर्ट वैली रिसोर्ट के गुलाम कादर बताते हैं कि सम के धोरों पर लोक संगीत की गूंज, कैमल सफारी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां सैलानियों को रेगिस्तान की असली पहचान से रूबरू करा रही हैं। शाम ढलते ही रेगिस्तान डीजे की धुन और लोक कलाकारों की थिरकन से जीवंत हो उठता है। सैलानियों के लिए रिसोर्ट्स में दुबई जैसी फीलिंग देने वाले लग्जरी टेंट, साथ ही खास राजस्थानी फूड की व्यवस्था की गई है, ताकि वे परिवार के साथ यादगार पल समेट सकें। प्रशासन अलर्ट मोड पर, सुरक्षा के बीच मनाया जा रहा जश्न भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं और यातायात को सुचारू रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि वाहनों की संख्या क्षमता से अधिक हो चुकी है, फिर भी प्रशासन सैलानियों को किसी बड़ी परेशानी से बचाने में जुटा है। पूनमसिंह स्टेडियम समेत कई जगहों पर पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि शहर के मुख्य इलाके पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रह सकें। जैसलमेर की बढ़ती साख का प्रतीक बना यह टूरिज्म बूम जैसलमेर में उमड़ी यह भीड़ सिर्फ सीजनल रश नहीं, बल्कि स्वर्णनगरी की बदलती पहचान का प्रतीक है। बढ़ती डिमांड और ऊंचे दाम यह दर्शाते हैं कि जैसलमेर की ‘ब्रांड वैल्यू’ लगातार मजबूत हो रही है। इस टूरिज्म बूम से होटल कारोबारियों के साथ-साथ रेहड़ी-पटरी वालों, छोटे दुकानदारों और कारीगरों को भी फायदा मिल रहा है। जैसलमेर का यह ‘गोल्डन पीरियड’ आने वाले सालों के लिए मजबूत आर्थिक नींव रखता नजर आ रहा है।


