भास्कर न्यूज | अंबिकापुर सूरजपुर जिले के ओड़गी ब्लॉक से लगे चिकनी गांव में पिछले तीन दिन में दो अलग-अलग हाथियों का दल उत्पात मचा रहा है। हाथियों ने गांव के आठ घरों को तोड़ दिया और उसमें रखा धान और दूसरा अनाज चट कर गए। पिछले एक सप्ताह से चिकनी गांव के आसपास पहला 12 हाथी का दल और दूसरा 20 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक सभी हाथी बस्ती में नहीं आते हैं, लेकिन दल से निकल कर दो दंतैल गांव में घुसते हैं और घरों को तोड़कर दहशत मचाते हैं। हाथियों की निगरानी के नाम पर सिर्फ वन विभाग का एक फायर वाचर है। वन विभाग का कोई भी अफसर गांव में हुए नुकसान को देखने तक नहीं पहुंचता। गांवों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश है। जिले का ग्राम पंचायत चिकनी, तमोर, पिंगला, कुदरगढ़ रेंज और घुई रेंज के बीच में है और ये दोनों इलाके हाथी प्रभावित क्षेत्र हैं। हाथियों की आमद और इलाके में पड़ रही 3 डिग्री की ठंड के कारण ग्रामीणों के लिए घर छोड़कर दूसरी जगह रात बिताना भी चुनौती बन गई है। इलाके में हाथी रात ही नहीं, धान खाने दिन में भी गांव में घुस रहे हैं। शुक्रवार को हाथियों के दल से एक दंतैल हाथी दोपहर 3 बजे के करीब गांव में घुस आया। हाथी को देखकर काम कर रहे ग्रामीण भागने लगे। इसके बाद किसी तरह ग्रामीण एकजुट हुए और हल्ला मचाया। फिर गुलेल से हाथी पर पत्थर मारे गए और जंगल की तरफ खदेड़ा। हाथी गांव से जंगल की तरफ भागा, तब लोगों ने राहत की सांस ली। ओड़गी ब्लॉक से 20 किमी दूर चिकनी गांव में 3 हजार की आबादी है। गांव हाथी प्रभावित इलाके में आता है। इसके बाद भी यहां हाथियों से रखवाली के लिए वन विभाग का सिर्फ एक फायर वाचर है। एक फायर वाचर के भरोसे पूरे इलाके में हाथियों की निगरानी नहीं की जा सकती है। इलाके में न तो रेंजर आते हैं और ना ही एसडीओ या दूसरे अफसर। लोगों को मुआवजा देने के लिए राजस्व विभाग किसी तरह से खानापूर्ति कर देता है। चिकनी गांव के बींचो-बीच बस्ती है भांडापारा। यहां रहने वाले मनोज कुमार के घर को हाथियों ने चार दिन में चार बार तोड़ा है। पूरा घर टूटकर गिर गया है। अब परिवार के सामने रहने-खाने का संकट खड़ा हो गया है। मनोज कुमार ने घर में मंडी में बेचने के लिए धान रखा हुआ था। घर तोड़ने के बाद हाथी ने धान के दो बोरे खिंचकर निकाले और आधा धान खाकर वहीं बिखेर दिया और चला गया। इसी तरह दूसरे और तीसरे दिन भी हाथियों ने धान खाने के लिए मनोज कुमार के घर के दूसरे हिस्से को तोड़ दिया। अब घर रहने ही लायक नहीं बचा। ^हाथी तो घर तोड़ ही रहे हैं। मैं कुछ लोगों को इलाके में भेजकर देखता हूं कि क्या स्थिति बनती है। दो दल हैं। भगाने में भी दिक्कत हो रही है। कोशिश कर रहे हैं कि कम से कम नुकसान हो। कर भी क्या सकते हैं। -मेवालाल साहू, रेंजर, ओड़गी वन परिक्षेत्र


