केबीसी तक पहुंचने वाली सरगुजा की पहली महिला बनीं विभा

भास्कर न्यूज | दरिमा अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय टीवी क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में अपनी बुद्धिमत्ता का लोहा मनवाकर 12 लाख रुपए की राशि जीतने वाली विभा चौबे का गृहग्राम बरगवां पहुंचने पर स्वागत किया गया। विभा सरगुजा जिले की पहली महिला है, जो केबीसी की हॉट सीट तक पहुंचीं है। ग्राम पंचायत बरगवां में आयोजित सम्मान समारोह में उत्साह का माहौल देखते ही बनता था। सरपंच संजीता सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने विभा चौबे का चंदन तिलक, पुष्पहार और गुलदस्तों के साथ अभिनंदन किया। जैसे ही विभा गांव पहुंचीं, ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। इस अवसर पर न केवल बरगवां, बल्कि आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे अपनी प्रेरणा की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। विभा ने कहा कि मेहनत, धैर्य और निरंतर अभ्यास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। केबीसी सिर्फ ज्ञान की परीक्षा नहीं, बल्कि आपके आत्मविश्वास और संकल्प का भी इम्तिहान है। उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं और छात्राओं से अपील की कि वे अपनी सीमाओं से बाहर निकलें और आत्मविश्वास के साथ बड़े सपने देखें। सरपंच संजीता सिंह ने कहा कि विभा ने न केवल गांव का नाम रोशन किया है, बल्कि वह अब पूरे जिले की बेटियों के लिए एक रोल मॉडल बन गई हैं। विभा चौबे की यह सफलता सरगुजा जिले के शैक्षणिक और सामाजिक इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जा रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस उपलब्धि से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और सामान्य ज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। विभा चौबे पेशे से शिक्षिका हैं और वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय, दरिमा में पदस्थ हैं। अपनी सफलता के पीछे के संघर्ष को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि केबीसी की हॉट सीट तक पहुंचना उनका वर्षों पुराना सपना था। इसके लिए उन्होंने पिछले तीन वर्षों से कड़ी मेहनत की। स्कूल की छुट्टी के बाद वे प्रतिदिन मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से सामान्य ज्ञान, इतिहास, विज्ञान और समसामयिक विषयों का अध्ययन करती थीं। उनकी इसी निरंतरता और लगन ने उन्हें मुंबई के मंच तक पहुंचाया। विभा ने पिता के सपने को किया साकार समारोह के दौरान विभा अपने पिता को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े प्रशंसक थे और हमेशा चाहते थे कि उनकी बेटी केबीसी के मंच पर जाए। हालांकि, आज उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन विभा ने उनके उसी सपने को अपना संकल्प बना लिया। उन्होंने कहा, यह जीत मेरे पिता की प्रेरणा और उनकी यादों को समर्पित है। उन्हीं के आशीर्वाद से आज मैं यहां खड़ी हूं।

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