भिंड जिले में नेशनल हाईवे-719 (ग्वालियर-इटावा रोड) अब तक का सबसे बड़ा ‘मौत का हाईवे’ साबित हुआ है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के 11 महीनों (जनवरी से नवंबर) में यहां 670 सड़क हादसे हुए, जिनमें 241 लोगों की जान चली गई। यानी हर रोज औसतन 2 हादसे हो रहे हैं। यह पिछले 7 सालों में सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसी वजह से पूर्व सैनिकों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन की कमान अब संत समाज ने संभाल ली है। ग्वालियर से इटावा तक इस हाईवे की कुल लंबाई 110 किलोमीटर है, जिसमें से 90 किलोमीटर हिस्सा भिंड जिले में आता है। इस टू-लेन हाईवे पर हर रोज करीब 20 हजार वाहन गुजरते हैं। वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण
ओवरटेक करते समय आमने-सामने की भिड़ंत होती है। मृतकों में सबसे ज्यादा संख्या बाइक चालकों की है। सबसे पहले वर्ष 2023 में मांग उठी
इस हाईवे के विस्तार को लेकर सबसे पहले वर्ष 2023 में मांग उठी थी। कैंसर बीमारी से पीड़ित रिटायर्ड फौजी सुनील शर्मा ने सबसे पहले हाईवे के निर्माण की मांग 19 मई 2023 में रखी। इसके बाद रिटायर्ड फौजियों के समूह को एकत्रित कर ये अभियान शुरू किया। इस तरह से सबसे पहले इन सेवा निवृत्ति फौजियों द्वारा पावई माता मंदिर पर सामूहिक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। 9 अगस्त 2023 को गोल मार्केट पर धरना प्रदर्शन कर रिटायर्ड फौजियों द्वारा हाईवे के निर्माण की मांग गोल मार्केट पर रखी। इसके बाद निरंतर प्रदर्शन चलते रहे। 1 मार्च 2024 को पूर्व सैनिकों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर आंदोलन को आगे बढ़ाया और ज्ञापन देते हुए मांग रखी। दंदरौआ धाम पर पोस्टर लेकर प्रदर्शन
इसके बाद सेवा निवृत्ति फौजियों ने देखा कि उनके आंदोलन में सिर्फ पूर्व सैनिक ही होते हैं। इसके बाद आंदोलन को व्यापक बनाए जाने की पहल शुरू हुई। सबसे पहले पूर्व सैनिक सुनील शर्मा फौजी ने दंदरौआ धाम पर पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और समर्थन जुटाया। इस दौरान दंदरौआ धाम के महंत महामंडलेश्वर रामदास महाराज को जोडा। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज को जोड़ा गया। संतों द्वारा एक बार कलेक्टे्ट पर प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने खंडा रोड पर 10 अप्रेल से आंदोलन को निरंतर दस दिन तक जारी रखा। संतों के इस आंदोलन पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आंदोलन को समाप्त कराए जाने का एंडी से चोटी का जोर लगाया। आखिर ये आंदोलन स्थगित किया गया। इसके बाद 24 मई को ग्वालियर में संतों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की। इसके बाद 17 जून को केंद्रीय मंत्री सिंधिया के नेतृत्व में संतों ने परिवहन मंत्री नितिन गड़करी से मुलाकत की। इस दौरान 2028 तक हाईवे को फोर लेन बनाए जाने की बात कही। साथ ही कहा गया था कि जल्द ही हाईवे के विस्तार को लेकर काम शुरू कराया जाएगा। इसके बावजूद ये सात माह बीतने के बाद कोई काम शुरू नहीं हो सका। अब 8 महीने का अल्टीमेटम सोमवार को ‘नो रोड-नो टोल’ आंदोलन के बाद अब सरकार को काम शुरू करने के लिए 8 महीने का अल्टीमेटम दिया गया है। संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज ने चेतावनी दी है कि यदि अब भी काम शुरू नहीं हुआ, तो ऐसा आंदोलन होगा जो निरंतर जारी रहेगा। जब तक सड़क नहीं बनेगी, संत समाज पीछे नहीं हटेगा। सात साल में हादसों का आंकड़ा


