धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार को हवन-पूजन, सत्याग्रह और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उज्जैन के ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर के वरिष्ठ पुजारी एवं अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गुरुजी विशेष रूप से उपस्थित रहे। भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और हिंदू समाज के बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल हुए। सुबह से ही भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई। कार्यक्रम के दौरान विधिवत हवन-पूजन हुआ, जिसके बाद सुंदरकांड पाठ और शांतिपूर्ण सत्याग्रह आयोजित किया गया। सभा को संबोधित करते हुए महेश गुरुजी ने भोजशाला आंदोलन में संतों की सक्रिय भागीदारी न होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आम जनता तो इस आंदोलन में लगातार सहभागी बन रही है, लेकिन देश के कई संत-महात्माओं की सक्रिय उपस्थिति अभी तक नहीं दिख रही है। संतों से आंदोलन में शामिल होने आह्वान किया
गुरुजी ने सनातन धर्म पर संकट आने पर शंकराचार्यों और नागा संन्यासियों की परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश की सीमाओं पर सेना लड़ती है, उसी प्रकार सनातन धर्म, मंदिरों और धार्मिक अवशेषों पर आक्रमण होने पर साधु-संतों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने मठों तक सीमित संतों से भोजशाला जैसे आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। महेश गुरुजी ने जोर देकर कहा कि देशभर के संतों को भोजशाला में एकत्र होकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस स्थल को प्रतिदिन पूजा-अर्चना के लिए स्वतंत्र किया जाए। गुरुजी ने एएसआई सर्वे में हिंदू अवशेष और मूर्तियां मिलने का हवाला देते हुए सरकार से इस विषय में स्पष्ट और ठोस कानून बनाने की अपील भी की। कार्यक्रम के अंत में भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि भोजशाला में प्रति मंगलवार होने वाला यह आयोजन निरंतर जारी रहेगा।


