सारनी के राख बांध में बढ़ी वन्यजीवों की मौजूदगी:तेंदुए का वीडियो आया सामने, सोलर प्लांट पर रोक की मांग, वन घोषित करने की अपील

बैतूल के सारनी के राख बांध क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस क्षेत्र की भूमि सोलर प्लांट स्थापना के लिए न दी जाए, क्योंकि यह अब सुरक्षित वन्यजीव आवास के रूप में विकसित हो चुकी है। सारनी निवासी वाइल्डलाइफ और नेचर कंजर्वेशन एक्टिविस्ट आदिल खान ने बताया कि राख बांध क्षेत्र में हाल ही में तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई है। उन्होंने रात्रिचर पक्षियों के सर्वेक्षण के दौरान तेंदुए का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह इलाका अब सक्रिय वन्यजीव आवास बन चुका है। आदिल के अनुसार, यह क्षेत्र पहले भी वन्यजीवों से समृद्ध था, लेकिन वन विभाग के वृक्षारोपण के बाद यहां जैव विविधता और मजबूत हुई है। सोलर प्लांट लगता तो वन्यजीव नहीं बचते आदिल खान ने कहा कि यह क्षेत्र पहले से ही वन्यजीवों से भरा हुआ था और वन विभाग के प्लांटेशन ने इसे और मजबूत बना दिया है। यदि उस समय सोलर प्लांट की अनुमति दे दी जाती, तो न तेंदुआ रहता और न ही पक्षियों की यह विविधता दिखाई देती। 106 हेक्टेयर में 50 हजार पौधे, इलाका बना हराभरा वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राख बांध क्षेत्र में 106 हेक्टेयर भूमि पर करीब 50 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इसके चलते यह क्षेत्र अब पूरी तरह हराभरा हो चुका है और वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण बन गया है। शासन स्तर पर होगा भूमि उपयोग का फैसला एसडीओ फॉरेस्ट अजय वाहने ने बताया कि वन विभाग ने यहां बड़े पैमाने पर प्लांटेशन किया है और यह इलाका अब पूरी तरह हरा-भरा है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। MPPGCL इस भूमि पर सोलर प्लांट लगाना चाहता है, लेकिन जहां तेंदुए के पगचिह्न और अन्य वन्य प्राणियों की मौजूदगी मिली है, वहां यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही है। चूंकि यह इलाका जंगल से भी सटा है, इसलिए अब इसका निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा कि इस भूमि का उपयोग किस रूप में किया जाए। सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर का अहम बफर जोन पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि राख बांध क्षेत्र केवल सारनी की हरियाली का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सतपुड़ा–मेलघाट टाइगर कॉरिडोर के लिए एक महत्वपूर्ण बफर ज़ोन की भूमिका भी निभाता है। यदि यहां औद्योगिक गतिविधियां शुरू की जाती हैं, तो इससे स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। सोलर प्लांट नहीं, संरक्षित वन घोषित करने की मांग स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन्यजीवों की लगातार बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए मांग की है कि राख बांध की भूमि सोलर प्लांट के लिए न दी जाए। उनका कहना है कि इस क्षेत्र को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए, ताकि यहां की जैव विविधता और वन्यजीव सुरक्षित रह सकें।

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