भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा जिला जेल में एनडीपीएस एक्ट के मामले में सवा साल से बंद विचाराधीन कैदी की करीब 20 फीट ऊंची दीवार से गिरकर मौत हो गई। बंदी जेल की दीवार पर लगी लाइट खराब होने से उसे ठीक करने के लिए चढ़ा था। जेल प्रशासन के अनुसार अभी तय नहीं है कि बंदी को करंट लगा था या सीढ़ी से पैर फिसलने से गिरा। कैदी के परिजन औैर समाज के लोग जिला अस्पताल पहुंच गए और मौत के कारणों पर संदेह जताते हुए मुआवजे की मांग को लेकर शव नहीं उठाने की घोषणा कर दी। जिला जेल में विचाराधीन कैदी गुरुवार दोपहर करीब 1.30 बजे बड़लियास थाना क्षेत्र के गांव चावंडिया का सांवरमल (30) पुत्र प्रहलाद ओझा जेल की मुख्य दीवार की लाइट ठीक कर रहा था। जेल कर्मचारी सीढ़ी पकड़े हुए था। इस दौरान अचानक सांवरमल ओझा नीचे फर्श पर गिर गया और सिर में चोट लगी। जेल प्रशासन ने एंबुलेंस से कैदी सांवरमल को महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेल अधीक्षक भैरूसिंह राठौड़ और अन्य कर्मचारी भी अस्पताल पहुंचे। इधर, मृतक के परिजन सूचना मिलने पर अस्पताल की मोर्चरी पहुंच गए। बड़ी संख्या में समाज और गांव के लोग भी पहुंचे। इधर उदयपुर से डीआईजी जेल कैलाश त्रिवेदी भी भीलवाड़ा आए और घटना की जानकारी ली। इधर परिजनों ने मांग की कि मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और बुजुर्ग माता-पिता को पेंशन दिलाई जाए। जब तक मांग नहीं मानी जाएगी, तब तक शव को नहीं उठाया जाएगा। बताया गया कि सांवरमल ओझा वर्ष 2023 में अफीम तस्करी के मामले में गिरफ्तार होने के बाद जिला जेल में बंद था। परिजनों का सवाल : बिजली काम नहीं जानता था तो उससे काम क्यों करवाया गया मृतक कैदी सांवरमल ओझा के परिजनों, समाजजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सांवरमल करीब सवा एक साल से जिला जेल में बंद है। वह बिजली संबंधी कोई काम नहीं जानता था। इसके बावजूद जेल प्रशासन का कहना था कि वह करीब पांच-छह महीने से जेल में बिजली संबंधी काम करता था। ऐसे में जेल प्रशासन उससे ये काम क्यों करवा रहा था। ^विचाराधीन बंदी सांवरमल से जबरन काम नहीं करवाया जा रहा था। बिजली संबंधी काम जानने के कारण वह स्वेच्छा से कुछ महीने से काम कर रहा था। -भैरू सिंह राठौड़, अधीक्षक जिला जेल


