अनगड़ा प्रखंड के हरातू पंचायत के शत प्रतिशत आदिवासी बहुल गांव कुदाझरिया में आजादी के बाद पहली बार बिजली की रोशनी पहुंची। गांव में सोमवार को बिजली पहुंचने पर गांववालों ने जम कर जश्न बनाया। ढोल मांदर के साथ नाचते गाते ग्रामीण नए ट्रांसफार्मर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने 25 केवीए के ट्रांसफार्मर का उद्घाटन करने पहुंचीं खिजरी विधायक राजेश कच्छप की प|ी रिया तिर्की को फूलमालाओं से लाद दिया। कुदाझरिया गांव में 15 परिवार भोक्ता (आदिवासी) का रहता है। सभी दिहाड़ी मजदूर हैं। इस गांव के बगल में ही सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना से बिजली का उत्पादन होता है जिससे पूरा राज्य रोशन हो रहा है, पर गांव तक बिजली पहुंचने में 78 वर्ष लग गए। खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने बीड़ा उठाया। उन्होंने बताया कि लोगों ने भी उनके इस प्रयास में सहयोग दिया। गांव के दिलेश्वर भोगता, फूलचंद भोगता, आशोमनी देवी, करमी देवी, रामकुमार गंझू, कुलेश्वर गंझू, मंशू गंझू, छटू गंझू बताते हैं कि बिजली के अभाव में हमारा जीवन नरक हो गया था। गांव में कोई शादी करने को तैयार नहीं होता था। हमलोग मजदूर हैं इसलिए बिजली की लड़ाई भी नहीं लड़ सके। कुछ साल पहले तक तो केरोसिन तेल से ढिबरी व लालटेन जलाकर घर में रोशनी लाते थे। लेकिन हाल के समय में बगल के गंझूटोली गांव में मोबाइल व इमरजेंसी लाइट, सोलर पैनल लाइट के माध्यम से घर में रोशनी करते रहे। बिजली के अभाव के कारण ही हमारी दो पीढ़ी अनपढ़ रही। सभी मजदूर बने। भोगता समाज के अगुआ व सहेदा के ग्राम प्रधान पारसनाथ भोक्ता बताते हैं कि उन्होंने गांव तक बिजली लाने का काफी प्रयास किया था।


