भास्कर न्यूज | अमृतसर गुरु नगरी को पवित्र वॉल्ड सिटी का दर्जा दिए जाने के बाद 12 गेटों के भीतर मीट शॉप चलाने वाले कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। मंगलवार को बड़ी संख्या में दुकानदार मांगों को लेकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। मगर डीसी के किसी अन्य कार्यक्रम में होने की वजह से नहीं मिल सके। इसके बाद दुकानदारों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन डीआरओ नवकीरत सिंह रंधावा को सौंपा। डीसी की ओर से दुकानदारों को बुधवार को मिलने का समय दिया गया है, जिसके चलते दुकानदारों का एक प्रतिनिधिमंडल फिर से डीसी से मुलाकात करेगा। दुकानदार मिनी सेक्रेट्रिएट स्थित डीसी दफ्तर में जाने लगे तो उन्हें पुलिस ने रोक लिया। किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया गया, जिसके पश्चात दुकानदार मेन गेट के पास एकत्रित हुए और वहां डीआरओ खुद पहुंचे और उनसे मांग पत्र लिया। मुख्यमंत्री के नाम के मांग पत्र को उन तक पहुंचाने की मांग भी की गई। दुकानदारों में शामिल मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार उन्हें उजाड़ने की बजाय वहीं कारोबार करने की अनुमति दे। उनका कहना था कि यदि सरकार ने शहर के 12 गेटों के भीतर पाबंदी लगानी ही है तो उसका दायरा सिर्फ 100 मीटर कर देना चाहिए, यानि गलियारे तक ही रहने देना चाहिए, ताकि बरसों से चले आ रहे छोटे कारोबार पूरी तरह खत्म न हों। उनका कहना था कि इस फैसले से न केवल उनका कारोबार प्रभावित होगा, बल्कि उनके परिवार भी सड़क पर आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से इसी इलाके में दुकानदारी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। अचानक जारी किए गए आदेशों से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। शरनजीत सिंह गोगी का कहना था कि मीट, कच्चे मीट और तंबाकू आदि का काम करने वाले करीब 4 हजार लोग है। इनके साथ इनके परिवार भी जुड़े हुए हैं तो ऐसे में परिवार पर भी पूरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह सरकार के इस फैसले का स्वागत तो करते है, लेकिन सरकार को उनके परिवारों के बारे में भी सोचना चाहिए।


