714 बच्चे रेस्क्यू…:मानव तस्करी रोकी, 1.70 लाख महिलाओं को सुरक्षा दी

पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहल को भी लगातार मजबूत कर रहा है। वर्ष 2025 के दौरान रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए चलाए गए अभियानों के तहत कई कार्य किए। इन अभियानों से न केवल सैकड़ों बच्चों को सुरक्षित भविष्य मिला, बल्कि लाखों महिला यात्रियों को भरोसेमंद और सुरक्षित रेल यात्रा का अनुभव भी हुआ। भटके बच्चों को मिला सहारा
यात्री ट्रेनों और रेलवे परिसरों में भटके, गुमशुदा अथवा संकट में फंसे बच्चों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत वर्ष 2025 में पश्चिम मध्य रेलवे ने सराहनीय उपलब्धि हासिल की। इस अभियान के अंतर्गत कुल 714 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 469 बालक और 235 बालिकाएं शामिल हैं। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को उनके परिजनों, पुलिस अथवा चाइल्ड लाइन जैसे गैर सरकारी संगठनों को सौंपा गया। इस पहल से न केवल बच्चों को सुरक्षित माहौल मिला, बल्कि मानव तस्करी और बाल शोषण जैसी गंभीर समस्याओं पर भी प्रभावी रोक लगी है। ऑपरेशन मेरी सहेली : महिला यात्रियों के लिए सुरक्षा का भरोसा महिला यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के उद्देश्य से आरपीएफ का ऑपरेशन मेरी सहेली भी वर्ष 2025 में प्रभावी रहा। इस अभियान के तहत पश्चिम मध्य रेलवे में 16 हजार 878 ट्रेनों में ड्यूटी लगाकर 1 लाख 70 हजार 411 महिला यात्रियों को यात्रा के दौरान सहायता और सुरक्षा प्रदान की गई। आरपीएफ की महिला एवं पुरुष कर्मियों की टीमों ने ट्रेनों और स्टेशनों पर महिलाओं से संवाद कर उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद भी की। यह अभियान रेलवे के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। ऑपरेशन मेरी सहेली ने महिला यात्रियों में भरोसा बढ़ाया और रेलवे को एक सुरक्षित, संवेदनशील और समावेशी परिवहन व्यवस्था के रूप में मजबूत किया है। नवाचार: स्क्रैप बिक्री से संसाधनों का बेहतर उपयोग
पश्चिम मध्य रेलवे ने वर्ष 2025 में स्क्रैप सामग्री को एकत्र कर ई-नीलामी के माध्यम से बेचते हुए संसाधनों के इष्टतम उपयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस दौरान कुल 428 करोड़ 38 लाख रुपये की स्क्रैप बिक्री की गई। रेलवे द्वारा की गई यह पहल न केवल राजस्व बढ़ाने में सहायक रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हुई।

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