साफ पानी दे नहीं पाए…:इंदौर में 8 मौतें, हर दूसरे घर में मरीज

देश के सबसे साफ शहर इंदौर की भागीरथपुरा कॉलोनी में गंदे पानी ने हाहाकार मचा दिया। उल्टी-दस्त की चपेट में आकर 8 लोगों की मौत हो गई और हर दूसरे घर से मरीज अस्पताल पहुंचा। बीते चार दिनों में 1146 लोगों का इलाज किया जा चुका है, जबकि 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। हालात ऐसे बने कि अस्पतालों में जगह कम पड़ गई है। इधर, स्वास्थ्य विभाग अब तक दूषित पानी से एक भी मौत की पुष्टि नहीं कर रहा, लेकिन नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय खुद मान चुके हैं कि दो से तीन मौतें दूषित पानी से हुई हैं। एक हफ्ते तक दबाया गया मामला : स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक सप्ताह से निगम के जिम्मेदार मामले को दबाने में लगे रहे। शिकायतें होती रहीं कि नलों से गंदा पानी आ रहा है, चैंबर ओवरफ्लो है, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। जबकि संपत्तिकर की वसूली के लिए निगम के कर्मचारी रोज आते थे। इधर, मामला खुला तो मंगलवार को नगर निगम ने कॉलोनी में 2703 घरों का सर्वे किया है। पेयजल वितरण टंकी से 4 सैंपल व घरों से 73 सैंपल लिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि 24 घंटे में प्रारंभिक और 48 घंटे में बैक्टीरियोलॉजिकल रिपोर्ट आएगी। अभी 50 टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। हेल्पलाइन नंबर 7440440511 जारी किया गया है। भागीरथपुरा में जिन लोगों की मौत हुई, उनके परिजनों से दैनिक भास्कर ने बात की। सभी ने उल्टी-दस्त से मौत होने की बात कही। मृतकों में उर्मिला यादव, नंदलाल पाल, मंजूला पति दिगंबर, सीमा प्रजापति, तारा बाई कोरी, गौमती रावत, उमा कोरी, संतोष बिगोलिया शामिल हैं। 4 महीने पहले नई लाइन का टेंडर हुआ, मौतें हुईं तो आनन-फानन में जारी इलाके में नई पानी की लाइन के लिए चार महीने पहले अगस्त में टेंडर जारी हुआ था, लेकिन अब तक नहीं खोला गया। करीब 2.40 करोड़ रुपए की लागत से नई लाइन डाली जानी थी और दस्तावेजों में गंदे व दूषित पानी की शिकायतों का उल्लेख भी था। इसके बावजूद अफसरों ने प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। मौतों के बाद आनन-फानन में टेंडर खोला गया।

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