राज्य के जर्जर भवनों में संचालित सरकारी स्कूलों के छात्रों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 502 जर्जर भवन वाले सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को सुरक्षित भवनों में पढ़ाने के आदेश जारी किए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि यह पूरी प्रक्रिया शीतकालीन अवकाश समाप्त होने से पहले पूरी कर ली जाए। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेश के अनुसार 290 स्कूलों को उनके अपने आंशिक रूप से सुरक्षित भवनों या पास के सुरक्षित स्कूल भवनों में ही संचालित किया जाएगा, जबकि 212 जर्जर भवन वाले स्कूलों के विद्यार्थियों की पढ़ाई नजदीकी अन्य सरकारी स्कूलों में करवाई जाएगी। छात्रों की पढ़ाई और सुविधाएं यथावत रखने के निर्देश शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिफ्ट किए गए विद्यार्थियों की
• कक्षा संचालन
• प्रायोगिक कार्य
• परीक्षा
• खेलकूद
• उपस्थिति व रिकॉर्ड सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु और व्यवस्थित रहनी चाहिए। विद्यार्थियों को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा। जरूरत पड़ने पर दो पारियों में चलेंगे स्कूल यदि किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होती है तो वहां दो पारियों में कक्षाएं संचालित की जा सकेंगी। हालांकि, समान कक्षाओं को एक ही पारी में रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पढ़ाई में बाधा न आए। स्टाफ की जिम्मेदारी तय, ड्रॉपआउट रोकने पर जोर जर्जर भवन वाले स्कूलों के विद्यार्थियों को शिफ्ट करने के बाद अतिरिक्त स्टाफ की जिम्मेदारी तय की गई है। शिक्षकों को अभिभावकों से संपर्क में रहकर यह सुनिश्चित करना होगा कि
• कोई छात्र अनुपस्थित न रहे
• ड्रॉपआउट की स्थिति न बने इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप और स्थानीय स्तर पर काउंसलिंग के निर्देश भी दिए गए हैं। भवन सुरक्षित होते ही वापस लौटेंगे छात्र आदेश में कहा गया है कि जैसे ही किसी जर्जर स्कूल का सुरक्षित भवन उपलब्ध होगा, वहां फिर से उसी स्कूल में पढ़ाई शुरू करवाई जाएगी। तब तक छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि मानी जाएगी। लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश पूरे मामले की निगरानी की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित पीईईओ/सीबीईओ को सौंपी गई है। स्कूल स्तर पर व्यवस्थाओं की सतत समीक्षा के निर्देश भी दिए गए हैं।


