समरावता प्रकरण की प्रशासनिक जांच को लेकर सरकार के निर्देश पर शुक्रवार को संभागीय आयुक्त महेश चंद्र शर्मा टोंक आए और जांच शुरू की। उन्होंने सर्किट हाउस में सुनवाई की, लेकिन इस सुनवाई में समरवाता के लोग नहीं आए। इस पर संभागीय आयुक्त ने पुलिस और प्रशासन समेत संबंधित कर्मचारियों के बयान लिए। संभागीय आयुक्त ने कहा कि अभी इसकी जांच जारी है कोई भी अपना पक्ष रख सकता है। अब इस मामले में कुछ दिनों बाद और आने की बात संभागीय आयुक्त ने कही। इनके साथ अजमेर से आईजी ओमप्रकाश भी आए थे। पूर्व आईएएस ने जांच पर उठाए सवाल
उधर, इस मामले में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व आईएएस केसी घुमरिया ने बताया कि बिना मौके पर जाए निष्पक्ष जांच कैसे होगी। एक अफसर दूसरे अफसर के खिलाफ कैसे सरकार को रिपोर्ट देगा। ये महज औपचारिकता करने आए। एक जगह बैठकर ही जांच करनी थी तो टोंक भी क्यों आए हैं। पहली बात तो ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले की न्यायिक जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से हो। इसलिए ग्रामीणों का टोंक जाने का कोई औचित्य नहीं था। फिर भी जांच अधिकारी को ग्रामीणों की पीड़ा सुननी है और ग्रामीणों के साथ हुई बर्बरता के निशान देखने है तो समरावता जाए। हाईकोर्ट के एडवोकेट लाखन सिंह मीणा ने बताया कि ग्रामीणों को इस केस की न्यायिक जांच से नीचे कोई जांच मंजूर नहीं है। सरकार न्यायिक जांच से क्यों डर रही है। सर्किट हाउस में कलेक्टर डॉ. सौम्या झा, पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान, एडीएम रामरतन सौकरिया, एडीएम मालपुरा विनोद कुमार मीणा समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।


