िभलाई | दीदी मन्दाकिनी श्रीरामकिंकर ने कथा के अंतिम दिन बताया कि विश्व साहित्य की अद्वितीय कृति है रामचरितमानस। उन्होंने आगे कहा कि गुरुदेव प्रत्यक्ष भगवान हैं। संसार की धूल आंख में पड़ जाती है तो हमारी आंख बंद हो जाती है लेकिन आपके नेत्रों में गुरुदेव की चरण धूलि पड़ जाय तो आपके नेत्रों में वह शक्ति प्राप्त हो जाती है जिससे आपको ईश्वर दिखाई देने लगता है। समाज में सिर्फ हाथ जोड़कर प्रणाम करने से ही भला नहीं होगा, जब तक हमारा सिर बड़े लोगों के चरणों में नहीं पड़ेगा, भगवान के चरणों में नहीं पड़ेगा, गुरुदेव के चरणों में नहीं पड़ेगा, तब-तक हमें ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी।


