भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बुधवार को एकाएक मौसम बदला तथा शीतलहर चलने के साथ ही दिनभर बादलवाही रही तथा रुक-रुककर बूंदाबांदी हुई। अधिकतम तापमान भी गत दिवस से 6.1 डिग्री सेल्सियस गिरकर 18.4 डिग्री सेल्सियस आ गया। मौसम वैज्ञानिकों ने आगामी तीन दिन ऐसा ही मौसम बना रहने व तापमान में 3 से चार डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आने की संभावना जताई है। बुधवार को सीजन का सबसे अधिक सर्द दिन रहा। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से गत रात्रि ही आसमान में बादलों का आवागमन शुरू हो गया। इससे न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। बुधवार सुबह से आसमान में घने काले बादल छाए रहे तथा शीत लहर रूपी ठंडी हवाएं चलती रहीं। दिनभर रुक-रुककर हल्की बंूदाबांदी भी हुई। शाम को सात बजे हल्की बारिश शुरू हो गई जो रात आठ बजे तक जारी रही। मौसम में आए बदलाव के चलते अब हाड़ कंपाने वाली ठंड का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 18.4 व न्यूनतम तापमान 11.0 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह के समय हवा में नमी 86 व शाम को 79 प्रतिशत दर्ज की गई। सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे तक 0.2 एमएम बारिश दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि आगामी दिनों में कोल्ड-डे रहने की संभावना बनी हुई है। हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी व उत्तरी हवाएं चलने से श्रीगंगानगर क्षेत्र में आगामी दिनों में कोल्ड-डे रहेंगे। 7-8 जनवरी को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से बूंदाबांदी व बारिश के आसार रहेंगे। ऐसे में आगामी 10 दिनों तक ठंड का प्रभाव बने रहने की संभावना है। एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तरी हरियाणा व आसपास के क्षेत्र के ऊपर एक परिसंचरण तंत्र बना हुआ है। इसके असर से बीकानेर, जोधपुर, अजमेर संभाग व शेखावाटी क्षेत्र के जिलों के कुछ भागों में गरज-चमक के साथ हल्की मावठ रूपी बारिश हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आगामी दो-तीन दिन ऐसा ही मौसम बना रहेगा तथा अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। आगे क्या: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एक जनवरी को बीकानेर, जयपुर, भरतपुर संभाग के कुछ भागों में हल्की मेघ गर्जन के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। 2 जनवरी से पुनः मौसम शुष्क रहने की संभावना है, लेकिन शीत लहर का प्रभाव जारी रहेगा। डॉ. सतीश शर्मा, संयुक्त निदेशक क्षेत्र में हो रही मावठ रूपी बारिश से रबी फसलों को सीधे तौर पर फायदा होगा। फसलों में सिंचाई पानी की मांग पूरी होगी। फसलों की बढ़वार अच्छी होगी तथा कोहरे का प्रभाव बना रहने से न्यूनतम तापमान भी ज्यादा नीचे नहीं गिरेगा। इससे फसलों में पाले की मार की आशंका भी नहीं होगी। किन्नू व गाजर की क्वालिटी बेहतर होगी तथा मिठास बढ़ेगी।


