ई -नगरपालिका 2.0 में तकनीकी दिक्कत:नगरीय निकायों के भुगतान, फायर एनओसी रिनुअल के मामले अटके; बिल्डिंग परमिशन में भी आ रही परेशानी

करीब एक महीने से ई-नगरपालिका पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के चलते भुगतान और फायर एनओसी में दिक्कत हो रही है। साल 2025 में अलग-अलग फेज में सभी 412 निकायों से जुड़े भुगतान, नागरिक सेवाएं और फायर एनओसी जैसी सुविधाएं नए पोर्टल ई-नगरपालिका 2.0 में जोड़ दी गई थी। भुगतान और फायर एनओसी जैसी परेशानियां आ रही हैं। बिल्डिंग परमिशन के लिए एबीपास 3.0 शुरू हो चुका है, इसमें भी बीच बीच में कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। लगभग 96 करोड़ की लागत से बने ई-नगरपालिका 2.0 पोर्टल में नगरीय निकायों की राजस्व से जुड़ी सेवाएं 1 अप्रैल से शुरू हो गई थीं। मैरिज, ट्रेड सर्टिफिकेट और बाकी नागरिक सेवाएं चरणों में शुरू कर दी गई। हालांकि, इंडस्ट्री सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि लगभग दो महीने से फायर एनओसी रिनुअल करने पर एसएमएस नहीं आ रहा है। इससे बड़ी दिक्कत है। लगभग 200 से 250 मामले रिनुअल के हैं। जानकारी के मुताबिक अभी नए पोर्टल में रिनुअल की व्यवस्था जुड़ने में समय है। तब तक रिनुअल के लिए भी नए आवेदन के लिए कहा जा रहा है। वहीं, इसके अलावा फायर एनओसी के मामले संभागीय जॉइंट डायरेक्टर और नगर निगमों में भी जाते हैं। जॉइंट डायरेक्टर स्तर पर लगभग 300 तो 16 नगर निगमों में 700 से अधिक आवेदन अभी अटके हुए हैं। दिसंबर तिमाही के 3-4 हजार भुगतान रुके निकायों द्वारा अलग-अलग मदों में ठेकेदारों और सेवा प्रदाताओं को दिए जाने वाले भुगतान भी अटके हैं। साल भर में 30 से 40 हजार भुगतान होते हैं। हर तिमाही के अंत में अधिक भुगतान होते हैं। दिसंबर तिमाही के लगभग 3 से 4 हजार भुगतान रुक हुए हैं। दिसंबर में ही सैप (SAP) से जुड़ी निजी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हो गया है और अभी नवीनीकरण नहीं हुआ है। इससे भी भुगतान के मामले अटक गए हैं। पुराने से नए पोर्टल में शिफ्टिंग से दिक्कतें हो रहीं
एबीपास में बिल्डिंग परमिशन की परेशानी की शिकायत मेरे सामने नहीं आई है। फायर एनओसी और भुगतान के मामले को जनवरी की शुरुआत में ही सुधार लेंगे। पुराने से नए पोर्टल में शिफ्टिंग में कुछ दिक्कतें तो हैं , पर नया सिस्टम आधुनिक होगा और अमृत रेखा सिस्टम से जुड़ेगा। इससे प्रोजेक्ट की जमीनी प्रगति देखकर उतना ही भुगतान होगा जितना काम हुआ है। वेतन में दिक्कत नहीं क्योंकि ये अभी पुराने पोर्टल से हो रहा है।
-दिव्यांक सिंह, एडिशनल कमिश्नर, नगरीय प्रशासन

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