नरसिंहगढ़ स्थित अग्रसेन भवन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का बुधवार को सातवां दिन सम्पन्न हुआ। इस दिन कथावाचक परम पूज्य गुरुदेव श्री विजय गुरु जी ने सुदामा चरित्र, परीक्षित मौक्ष और श्री सुखदेव की विदाई का कथा विस्तारपूर्वक सुनाया। कथावाचक ने बताया कि भले ही हम जीवन के मार्ग को जानते हैं, परंतु गुरु के मार्गदर्शन के बिना रास्ता प्राप्त नहीं होता। केवल भक्ति और आस्तिक समर्पण ही हमारे भीतर दिव्यता स्थापित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जब भागवत की कृपा हमारे जीवन में आती है, तो यह सभी अंधकार को दूर कर जीवन में प्रकाश और शुद्धता लाती है। गुरु ने यह भी स्पष्ट किया कि महाभारत और भागवत केवल ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि जीवन में जीवन जीने का मार्ग और आत्मा की शुद्धता सिखाने वाले साधन हैं। भक्ति में अत्यधिक शक्ति होती है और यह किसी के बाहरी रूप से नहीं, बल्कि आत्मिक श्रद्धा और विश्वास से कार्य करती है। कथा समाप्त होने के बाद पूर्णाहुति हवन और महा प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। प्रसाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आशीष अग्रवाल, ईश्वर चंद्र अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, निरंजन अग्रवाल, बंटी अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, मोहन अग्रवाल, अजय अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, मुन्ना अग्रवाल, जगन्नाथ मित्तल, सुरेश अग्रवाल, कौशल अग्रवाल, विनोद अग्रवाल और संजय अग्रवाल सहित अन्य स्थानीय लोगों ने विशेष योगदान दिया।


