ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक अहम फैसले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज करने का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को परिवादी अमित जैन को 90,705 रुपए की बीमा राशि 45 दिनों के भीतर अदा करने का आदेश दिया है। तय समयसीमा में भुगतान नहीं होने की स्थिति में कंपनी को इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह मामला दस्तावेजों में मामूली तकनीकी विसंगतियों और तथाकथित “ओवर राइटिंग” के आधार पर बीमा क्लेम निरस्त किए जाने से जुड़ा है। आयोग ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और सेवा में कमी करार दिया है। आयोग की सख्त टिप्पणी मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी केवल तकनीकी खामियों का हवाला दे रही थी, लेकिन वह यह साबित नहीं कर सकी कि इलाज फर्जी, अनावश्यक या नियमों के खिलाफ था। आयोग ने स्पष्ट कहा कि केवल दस्तावेजों में मामूली सुधार या विसंगति के आधार पर बीमा क्लेम निरस्त करना उचित नहीं है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जब अस्पताल में भर्ती होने और इलाज के ठोस प्रमाण मौजूद हों, तो तकनीकी आधार पर बीमा राशि रोकना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। इसे सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने बीमा कंपनी को पूरा भुगतान करने के निर्देश दिए। इलाज के बाद भी क्लेम खारिज परिवादी अमित जैन ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी की वैध अवधि के दौरान 3 दिसंबर 2022 को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एक मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 10 दिसंबर 2022 को डिस्चार्ज होने तक उनके इलाज पर कुल 90,705 रुपए खर्च हुए। इलाज के बाद अमित जैन ने खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी में दावा पेश किया, लेकिन कंपनी ने 15 फरवरी 2023 को डिस्चार्ज समरी और अन्य दस्तावेजों में “ओवर राइटिंग” व रिकॉर्ड को अपर्याप्त बताते हुए क्लेम खारिज कर दिया।


