पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने यात्रियों की सुविधा और ट्रेनों की समय में सुधार के लिए एक नई समय सारणी लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत 63 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई है, जिससे यात्रियों के सफर में समय की बचत होगी। यह बदलाव नए साल 2026 से प्रभावी होगा। मंडल रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन में तैयार की गई इस समय सारणी से झाबुआ जिले की लाइफ लाइन मानी जाने वाली दाहोद-रतलाम मेमू ट्रेन भी लाभान्वित होगी। जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, इस सुधार से साप्ताहिक आधार पर कुल 2627 मिनट की बचत होगी। इन खंडों पर 63 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई गई जिन प्रमुख खंडों पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई गई है, उनमें नागदा-रतलाम-गोधरा खंड पर 26 ट्रेनें, नागदा-उज्जैन-इंदौर-महू खंड पर 27 ट्रेनें और रतलाम-चित्तौड़गढ़ खंड पर 10 ट्रेनें शामिल हैं। नई समय सारणी के तहत कई महत्वपूर्ण गाड़ियों के रनिंग टाइम में कटौती की गई है। इससे मेमू और इंटरसिटी के यात्रियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, दाहोद-वडोदरा मेमू में 40 मिनट, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस में 27 मिनट, नागपुर-इंदौर एक्सप्रेस में 20 मिनट, चित्तौड़गढ़-रतलाम डेमू में 20 मिनट, दाहोद-रतलाम मेमू में 15 मिनट, गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस में 15 मिनट, रतलाम-चित्तौड़गढ़ डेमू में 15 मिनट और भोपाल-इंदौर इंटरसिटी/उज्जैन-इंदौर पैसेंजर में 10 मिनट की बचत होगी। संयुक्त प्रयासों से बढ़ी ट्रेनों की रफ्तार, यात्रियों को मिलेगा लाभ ट्रेनों की गति बढ़ाने का यह लक्ष्य केवल परिचालन विभाग के प्रयासों से नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग (ट्रैक मेंटेनेंस), सिग्नल और दूरसंचार, यांत्रिक विभाग और संरक्षा टीम के संयुक्त प्रयासों से संभव हो पाया है। रेलवे के अनुसार, ट्रेनों की गति बढ़ने से दोतरफा लाभ होगा। यात्री कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, वहीं रनिंग टाइम कम होने से बिजली और ईंधन की बचत होगी, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में भी 27 ट्रेनों की गति बढ़ाकर प्रतिदिन औसतन 107 मिनट बचाए गए थे। अब 2026 में इस पहल को और भी व्यापक स्तर पर लागू किया गया है।


