बालाघाट जिले में संरक्षित वन्यजीवों की मौत का सिलसिला जारी है। उत्तर सामान्य वनमंडल के दक्षिण लामता अंतर्गत मगदर्रा सर्किल से एक किलोमीटर दूर एक खेत में गुरुवार को एक मादा तेंदुए का शव मिला। यह एक सप्ताह के भीतर जिले में दूसरे तेंदुए की मौत है। सूचना मिलने पर वनमंडलाधिकारी रेशमसिंह धुर्वे और परिक्षेत्र अमला तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। शव का पोस्टमॉर्टम पशु चिकित्सकों की एक टीम ने किया, जिसमें सिविल सर्जन डॉ. घनश्याम परते, पशु प्रजनन अधिकारी डॉ. राजेश्वर सिंह नगपुरे और पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ. पूजा धुर्वे शामिल थे। बेकाबू होकर गिरने से मौत वन मंडल अधिकारी रेशम सिंह धुर्वे ने बताया कि मादा तेंदुए के सिर और पेट में चोट के निशान मिले हैं। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि किसी पेड़ या चट्टान से कूदते समय बेकाबू होकर गिरने से उसे चोटें आईं, जिससे उसकी मौत हो गई। घटनास्थल पर शिकार या करंट लगने के कोई निशान नहीं मिले हैं। पोस्टमॉर्टम करने वाले पशु अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. घनश्याम परते ने पुष्टि की कि तेंदुए की नाक, सिर और पेट में चोटें थीं। उन्होंने बताया कि ये चोटें गिरने या किसी बाहरी आघात से हो सकती हैं, लेकिन मारने जैसे कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं। आवश्यक जांच के लिए सैंपल ले लिए गए हैं। 23 दिसंबर को हुई थी नर तेंदुए की मौत इससे पहले, 23 दिसंबर को उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता के जंगली क्षेत्र से एक नर तेंदुए का शव संदिग्ध हालत में मिला था। उस तेंदुए की मौत की वजह भी एक सप्ताह बाद भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। मादा तेंदुए की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा। शव का प्रोटोकॉल के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया है।


