मां देवकी व वासुदेव का जीवन तपस्वी साधक जैसा था: निरंजन

भास्कर न्यूज | बालोद श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन आचार्य निरंजन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, पूतना वध एवं माखन चोरी की लीलाओं का वर्णन किया। आचार्य ने बताया कि द्वापर युग में अत्याचारी कंस ने अपने पिता उग्रसेन को कारागार में बंद कर स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। देवकी कंस की प्रिय बहन थी, जिनका विवाह वासुदेव के साथ हुआ। आकाशवाणी के माध्यम से कंस को यह ज्ञात हुआ कि देवकी की आठवीं संतान से उसकी मृत्यु होगी, जिससे भयभीत होकर उसने देवकी एवं वासुदेव को कारागार में डाल दिया। कथा में बताया गया कि भाद्र मास की अष्टमी तिथि, शोभन योग, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार की मध्यरात्रि में मथुरा कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। आचार्य ने कहा कि माता देवकी एवं वासुदेव का जीवन तपस्वी साधक के समान था। साधक के जीवन में अनेक कठिनाइयों के पश्चात ही ईश्वर का दर्शन संभव होता है। इस अवसर पर आयोजक परिवार ने कृष्ण जन्म की झांकी निकाली। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया। कथा में टीकम पिपरिया, आरडी दास, पुरुषोत्तम देशमुख, चुरामन साहू, हीरामन लाल, चिरौंजी लाल, राकेश साहू, युवराज सिंह साहू, चिम्मन लाल देशमुख, ललित हरदेल, प्रमोद शर्मा, शत्रुघ्न प्रसाद शर्मा, शिव कलिहारी, अहिल्या बाई, ममता साहू, सविता साहू, चमेली साहू, पूर्णिमा देशमुख, सुनंदा देशमुख, जागेश्वरी हरदेल मौजूद थे।

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