भास्कर संवाददाता | बड़वानी पाटी जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम कालाखेत के पहाड़ी गांव में एक जीवित व्यक्ति को एसआईआर सर्वे के दौरान मृत घोषित कर दिया। जब इसकी जानकारी उन्हें लगी तो वह नाम जुड़ने के लिए पहुंचे। सर्वे के काम में लापरवाही को लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। जागृत आदिवासी दलित संगठन के कार्यकर्ता गुरुवार दोपहर 2 बजे तहसील कार्यालय पहुंचे। तहसीलदार की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार से इस संबंध में पूछताछ की तो नायब तहसीलदार के पास नाम जोड़ने को लेकर कोई जानकारी नहीं दे पाएं। गांव के युवक भाकीराम सोलंकी ने बताया मैं मजदूरी करने के लिए गया था। सर्वे के दौरान परिवार वालों ने मेरे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे लेकिन इसके बाद भी मेरा नाम डिलीट कर दिया गया। उसे डिलीट नामों में जोड़ा गया है। मजदूरी पर गए भाकीराम के परिवार ने उसकी जानकारी बीएलओ को दी थी लेकिन फिर भी उसका नाम काट दिया गया। 23 दिसम्बर को एसआईआर की ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद अभी तक गांव-गांव में मतदाता सूची और डिलीट किए गए नामों की सूचियां नहीं पहुंची है। गांवों में चस्पा नहीं हुई सूचियां संगठन के कार्यकर्ताओं ने बताया अधिकांश बीएलओ को सर्वे नहीं करने दिया गया। अधिकारियों ने उन्हें जनपद तहसील में ही बैठा कर रखा। अब भी गांवों में सूचियां चस्पा नहीं की गई हैं। आपत्ति दर्ज करने का समय खत्म हो रहा है। पाटी के आदिवासी ब्लॉक के गांवों में हजारों की संख्या में लोग पलायन पर जाते हैं। शासन प्रशासन के रवैया देख कर यहीं डर है कि ऐसे और कई नाम निकलेंगे। उन्होंने कहा शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण आदिवासियों का नाम मतदाता सूची में से हमेशा के लिए काट दिया जाएगा। शासन प्रशासन अपनी नींद से जागे और किसी भी आदिवासी का नाम मतदाता सूची से नहीं कटे।


