राज्य के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों के सहायक शिक्षकों का अंतर जिला स्थानांतरण किया जाना है। इसके लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा ट्रांसफर को पारदर्शी बनाने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा स्कूलों से ई-विद्या वाहिनी पोर्टल पर प्राथमिक शिक्षकों के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों का डाटा मांगा गया था। पर इसमें बड़े पैमाने पर लापरवाही सामने आई है। लेकिन 24 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार 34,886 स्कूलों में से केवल 6,546 ने ही डाटा एंट्री की थी। वहीं सिर्फ 1,571 स्कूलों ने उसे फ्रीज किया था। इसे प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने अत्यंत चिंताजनक बताया है। निदेशक मनोज कुमार रंजन ने सभी जिला शिक्षा अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त शिक्षकों की पदों की डाटा एंट्री और फ्रीज की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराई जाए। इस निर्देश का अनुपालन नहीं होने की स्थित में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य इंटर जिला शिक्षक ट्रांसफर को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना है। जिस डाटा से व्यवस्था को पारदर्शी बनना था, वही अब उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती दिख रही है। अब देखना है कि चेतावनी के बाद सिस्टम समय पर जागता है या फिर कार्रवाई की नौबत आती है। यह डाटा वास्तविक रिक्त पदों के आधार पर ट्रांसफर, पारदर्शिता, और प्रशासनिक विवाद से बचाव के लिए आधार बनेगा। जनवरी के पहले सप्ताह में ट्रांसफर मॉड्यूल लाइव होना है, इसलिए देरी से पूरी प्रक्रिया अटक सकती है। लेकिन डाटा एंट्री नहीं होने के कारण देर स्वाभाविक है।


