झारखंड में फसल बीमा योजना किसानों के लिए भरोसे का जरिया बनने के बजाय अब चिंता का कारण बनती जा रही है। खरीफ (धान और मक्का) 2024 में हुए नुकसान का करीब 21 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम अब तक नहीं मिला, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ा है। इसका सीधा असर रबी फसल बीमा पर पड़ा है। रबी 2024-25 में जहां 1.75 लाख किसानों ने बीमा कराया था, वहीं रबी 2025-26 में यह संख्या घटकर 1.18 लाख रह गई है। यानी करीब 57 हजार किसानों ने बीमा से दूरी बना ली, जबकि खेती का रकबा कम नहीं हुआ है। राज्य में रबी की खेती करीब 10 लाख हेक्टेयर में होती है। इस सीजन में आलू, सरसों, चना और गेहूं को अधिसूचित फसलों में शामिल किया गया है। योजना धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, पाकुड़, रांची, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और खूंटी जिलों में लागू है। इसके बावजूद किसानों का भरोसा कमजोर पड़ा है। खरीफ 2024 में लगभग 13 लाख किसानों की फसल को नुकसान हुआ था। करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित रहा, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। राज्य में कुल खरीफ खेती लगभग 28 लाख हेक्टेयर में होती है, जिसमें करीब 20 लाख किसान शामिल हैं। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है 30% नुकसान की शर्त बाधा योजना के तहत 30% से कम नुकसान पर क्लेम नहीं मिलता। इससे ज्यादा होने पर पंचायत-प्रखंड स्तर पर आकलन किया जाता है। इसमें जियो टैगिंग के जरिए रिपोर्ट तैयार होती है। योजना का प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं। खरीफ 2024 का क्लेम कब मिलेगा जिला स्तरीय कमेटी रिपोर्ट तैयार कर चुकी है। रिपोर्ट का सत्यापन कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। जानकारों के अनुसार जनवरी में राशि जारी होने की संभावना है, जिसके 15 दिन के भीतर किसानों के खातों में पैसा पहुंच सकता है। दलहन, तिलहन और सब्जियों को बीमा दायरे में लाने की मांग राज्य में बड़ी संख्या में किसान दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती करते हैं। करीब 3 लाख हेक्टेयर में सब्जी उत्पादन होता है। फूलगोभी का उत्पादन लगभग 2 लाख टन है। पत्ता गोभी, परवल, करैला, भिंडी और तरबूज की भी बड़े पैमाने पर खेती होती है। किसानों की मांग है कि इन फसलों को भी बीमा योजना में शामिल किया जाए।


