संभाग के सबसे बड़े एमबी सरकारी अस्पताल के ट्रॉमा विभाग में एक्स-रे की व्यवस्था खुद ही ट्रॉमा (आघात) में है। विभाग की 3 एक्सरे मशीनों में से एक बीते 2 माह से खराब है, जबकि दूसरी आधा काम रही है।तीसरी मशीन जरूर पूरी तरह काम कर रही है, लेकिन उस पर दबाव बढ़ गया। ऐसे में इसकी ओपीडी में रोज आने वाले 500 मरीजों की परेशानी भी बढ़ गई। इसके बीच कोढ़ में खाज की स्थिति बनी और ट्रॉमा के इमजरेंसी में चल रही मशीन भी पिछले रविवार को खराब हो गई। ट्रॉमा विभाग में करीब 500 की ओपीडी रोज रहती है। इनमें से औसतन 300 के रोज एक्सरे होते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में 60-70 एक्सरे होते हैं। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से बात की गई तो जवाब मिला- इमरजेंसी वाली मशीन को शुक्रवार रात शुरू करा दिया गया। अन्य मशीनों को भी जल्द सही कराएंगे। ट्रॉमा में अधिकतर मरीज एक्सीडेंट, छत से गिरने सहित गंभीर चोट के मरीज आपात स्थिति में पहुंचते हैं। गंभीर चोट के बावजूद दर्द-पीड़ा के बीच मरीज लाइन में लगकर एक्सरे का इंतजार करते हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों व बच्चों को आ रही है। पहली मशीन: 2 माह से बंद ट्रॉमा विभाग के कमरा नंबर 301 में रिमोट सेंसर वाली एलेंजर मशीन 2 माह से बंद है। टेंडर खत्म हो गया है। अब नई कंपनी को टेंडर मिला है। उसने अभी इसे ठीक करने की प्रकिया शुरू नहीं की है। अधीक्षक बोले- आपात स्थिति में रेडियोलॉजी में भी एक्सरे ट्रॉमा के इमरजेंसी विभाग की एक्स-रे मशीन रविवार शाम को बंद हो गई। इस मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन से बात की तो वे बोले- इमरजेंसी की एक्सरे मशीन शुक्रवार रात फिर से शुरू कर दी गई है। ट्रॉमा विभाग में खराब मशीन भी जल्द शुरू हो जाएगी। पिक्चर कैसेट के पार्ट्स बाहर से मंगवाए जाएंगे। आपात स्थिति के मरीजों के लिए रेडियोलॉजी विभाग के कमरा नंबर 44 में भी 24 घंटे एक्सरे रूम चालू है। दूसरी: 4 की जगह 1 कैसेट एलेंजर मशीन खराब होने के बाद पोर्टेबल मशीन काम में ले रहे हैं। इसमें एक बार में दो अंगों का एक्सरे हो सकता है, लेकिन 4 पिक्चर कैसेट में से सिर्फ 1 ही है। ऐसे में एक बार में एक हिस्से का एक्सरे कर रही।


