भरतपुर जिले की सांस्कृतिक और इतिहास आने वाले समय में पर्यटकों को और भी ज्यादा करीब से देखने को मिलेगा। सदियों की विरासत समेटे वैर किला, अजेय लोहागढ़ में किशोरी महल, शाही ठाठ-बाठ के लिए प्रसिद्ध डीग और धार्मिक आस्था का केंद्र धौलपुर के मचकुंड चारों ही अब पर्यटन के नए अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार और पर्यटन विभाग की योजनाएं इन धरोहरों को सिर्फ संवार नहीं रहीं, बल्कि उन्हें जीवंत अनुभव में बदलने की तैयारी कर रही हैं। वैर के ऐतिहासिक किले में स्थित सफेद महल जल्द ही नए रंग-रूप में नजर आएगा। 4 करोड़ 28 लाख रुपए की लागत से चल रहा सौंदर्यीकरण कार्य महल की वास्तुकला को उसकी मूल पहचान के साथ संजोने का प्रयास है। वहीं, भरतपुर राजकीय संग्रहालय के पीछे विरान पड़ा हुआ किले में स्थित पदम हवेली में ढाई करोड़ रुपए से सौंदर्यीकरण का काम होगा,जिसका तकमीना भी तैयार कर लिया गया है। आने वाले समय दोनों ही जगह सौंदर्यीकरण का काम कराया जा रहा है। वहीं, धौलपुर का मचकुंड, जहां आस्था और इतिहास साथ-साथ बहते हैं, अब पर्यटन विकास की नई दिशा में कदम रख रहा है। कुंड परिसर के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार से यह स्थल न केवल श्रद्धालुओं बल्कि देश-विदेश के सैलानियों को भी आकर्षित करेगा। पिछले 3 साल से मचकुंड में 7 से 8 करोड़ रुपए की लागत से काम चल रहा है। जहां शांत वातावरण और पौराणिक कथाओं से जुड़ा मचकुंड एक खास अनुभव देने को तैयार है। संग्रहालय अधीक्षक राजन कुमार ने बताया कि वैर किले के अंदर सफेद महल का काम वर्ष 2028 तक पूरा होगा। डीग महल के म्यूजियम मार्च तक तैयार हो जाएगा। मचकुंड में भी काम चल ही रहा है और पदम हवेली के लिए वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। डीग महल में 4 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा म्यूजियम 2026 तक तैयार होगा, जो ब्रज क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और विरासत को एक छत के नीचे समेटेगा। डीग के महलों और बागों की शान के बीच यह म्यूजियम पर्यटकों को अतीत की यात्रा पर ले जाएगा। इन सभी परियोजनाओं के पूरा होते ही वैर–डीग–धौलपुर एक नए टूरिज्म सर्किट के रूप में उभरेगा। इसका असर सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा—स्थानीय युवाओं को रोजगार, कारीगरों को पहचान और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। नए साल में यह इलाका सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि इतिहास को महसूस करने का अनुभव बन जाएगा। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीक्षक सोहन चौधरी ने बताया कि ऐतिहासिक किशोरी महल में मरम्मत कार्य के दौरान एक अंडरग्राउंड रास्ता मिला है,जिसकी मरम्मत करा पर्यटकों के लिए रास्ता खोला जाएगा। किले के पीछे से लैंड से स्क्रेपिंग( मिट्टी हटाने का कार्य करेंगे)। रोजगार कार्यालय के पास टिकिट काउंटर बनाया जाएगा और वहीं से ही किशोरी महल तक के जाने का रास्ता तैयार किया जाएगा। लगभग 3 करोड़ की लागत से यह पूरा काम होगा। आने साल में किशोरी महल इतिहास को पर्यटक और करीब से जान सकेंगे।


