भास्कर न्यूज | गुमला राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन व्यवहार न्यायालय में किया गया। जिसमें 26977 मामलों का निष्पादन किया गया और 16 करोड़ 7 लाख 7 हजार 388 रुपए का राजस्व संग्रहित किया गया। पीडीजे ध्रुवचंद्र मिश्रा ने कहा कि लोक अदालत मामलों को सुलझाने का त्वरित तथा सबसे सस्ता प्लेटफॉर्म है। जहां विवाद दोनों पक्षों की सहमति से खत्म होता है तथा लोक अदालत से समाप्त मामलों में अपील भी नहीं होती है। उन्होंने लोगों से इस फोरम का उपयोग अपने मामलों के त्वरित निपटारे के लिए करने का आग्रह किया ताकि न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय की बचत हो सके। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय ओमप्रकाश ने कहा कि वर्ष में चार बार राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। लोग इसका लाभ उठाएं। एडीजे प्रथम प्रेम शंकर ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने मामलों को निपटारा कर खुशी-खुशी अपने घर जाएं। पुराने तरह के वाद एवं नए तरह के वाद को निपटने के लिए उच्चतम न्यायालय से लेकर सिविल कोर्ट तक राष्ट्रीय लोक अदालत सभी जगह लगाया जाता है। एडीजे तृतीय भूपेश कुमार ने कहा कि लोक अदालत में किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगता है और दोनों पक्षों की सहमति से मामले का निष्पादन कर दिया जाता है। अवर न्यायाधीश सह सचिव डालसा राम कुमार लाल गुप्ता ने भी लोगों से अधिक से अधिक मात्रा में मामले का निष्पादन कराने के लिए कहा। राष्ट्रीय लोक अदालत में लाभुकों को मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा राशि का चेक प्रदान किया गया। जिसमें सुमित्रा देवी को 52,67322 रुपये, जया केसरी को 39,77,898 रुपए, पीटर लकड़ा को 14,84,457 रुपए, कलावती देवी को 13 लाख 90000 रुपए, जीरा देवी को 100000 रुपए का चेक प्रदान किया गया। कुटुंब न्यायालय में दो मामलों में पारिवारिक कलह को समझौता के द्वारा दूर करते हुए पुण: दांपत्य जीवन का स्थापना किया गया तथा पति-पत्नी एक दूसरे को माला पहनाए तथा अच्छे से रहने का आश्वासन दिया। मौके पर स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष डीके पाठक, सीजीएम मनोरंजन कुमार, एसीजेएम पार्थ सारथी घोष एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारी तथा शंभू सिंह पूर्व सदस्य स्थाई लोक अदालत, लीगल एड डिफेंस काउंसिल केडीएन ओहदार, बुंदेश्वर गोप, विद्या निधि शर्मा, ईंदू पांडे, जितेंद्र सिंह, प्रकाश कुमार, आशा, मनीष कुमार तथा बैंकों के पदाधिकारी गण एवं अन्य विभाग से संबंधित पदाधिकारी थे।


