सतना में NHRC टीम की जांच पूरी:कलेक्टर-एसपी से मुलाकात, ब्लड बैंक का फिजिकल वेरिफिकेशन; 5 बच्चों को HIV पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया

सतना में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की इंवेस्टिगेशन डिवीजन की दो सदस्यीय टीम ने गुरुवार को जांच पूरी कर ली। चार दिन तक चली इस जांच के अंतिम दिन टीम ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की और जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का भौतिक सत्यापन किया। जांच दल में शामिल रोहित सिंह और संजय कुमार ने गुरुवार सुबह सबसे पहले पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह से मुलाकात की। इसके बाद कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से सौजन्य भेंट की। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह और ब्लड बैंक के पूर्व प्रभारी डॉ. देवेंद्र सिंह के साथ जिला अस्पताल पहुंचकर ब्लड बैंक का फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया। आईसीटीसी कर्मचारियों से पूछताछ, दस्तावेज जुटाए जांच के दौरान जिला एड्स नियंत्रण सोसायटी की नोडल अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता सहित आईसीटीसी के कर्मचारियों से पूछताछ की गई। टीम ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी जुटाए और उनकी जांच की। सर्किट हाउस में बुलाए गए पूर्व कर्मचारी शाम करीब 7 बजे टीम सर्किट हाउस पहुंची। रात 8 बजे ब्लड बैंक के दो पूर्व लैब टेक्नीशियन और एक नर्सिंग ऑफिसर को सर्किट हाउस तलब किया गया। तीनों को अलग-अलग बुलाकर उनके नाम-पते दर्ज किए गए और उनके दायित्वों के बारे में विस्तार से पूछताछ की गई। जांच अधिकारियों ने प्रत्येक कर्मचारी से लगभग आधे घंटे तक जानकारी ली। 29 दिसंबर से चल रही थी जांच गौरतलब है कि एनएचआरसी की टीम 29 दिसंबर को सतना पहुंची थी। चार दिनों में टीम ने सबसे पहले पीड़ित बच्चों के परिजनों के बयान दर्ज किए। इसके बाद मामले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। इस दौरान कई अहम दस्तावेज भी तलब किए गए। जांच प्रक्रिया के दौरान स्थानीय अधिकारियों को टीम से दूर रखा गया। दिल्ली लौटेगी टीम, आयोग को सौंपेगी रिपोर्ट जानकारों के अनुसार जांच दल शुक्रवार को दिल्ली लौटेगा और अपनी अंतिम रिपोर्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपेगा। टीम में पुलिस इंस्पेक्टर रैंक के दो अधिकारी शामिल थे, जिन्हें क्राइम इंवेस्टिगेशन का विशेष अनुभव है। यह पूरा मामला अनिरुद्ध केशारे की ऑनलाइन शिकायत के बाद एनएचआरसी के संज्ञान में आया था। शिकायत में इसे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में गंभीर लापरवाही बताते हुए बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।

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