विधायक पत्नी-बेटे को जिताएंगे या समर्थकों को? बागी व निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं गणित

नगर निगम चुनाव के परिणाम आप विधायकों और दो कैबिनेट मंत्रियों की जमीनी पकड़ भी तय करेंगे। आप विधायकों को जहां टिकट वितरण को जीत के प्रतिशत से सही ठहराना होगा, वहीं जिले के दो कैबिनेट मंत्रियों तरुणप्रीत सोंद और हरदीप मुंडियां को भी परिणामों को आप के पक्ष में बदलकर ताकत का अहसास कराना होगा। ये आप नेताओं के लिए इतना आसान भी नहीं होगा क्योंकि आप विधायकों के सामने जहां अपनी प|ी और बेटे, भाई को जिताने की जिम्मेदारी है, वहीं अन्य वार्डों में प्रचार कर अपने समर्थक प्रत्याशियों को जिताना भी है। जिस विधायक के हलके से अधिक प्रत्याशी जीतेंगे, उसका राजनीतिक कद भी बढ़ना तय है। मेयर बनाने की स्थिति में आप संगठन और विधायकों से राय ली जाएगी जिसमें संभावना है कि विधायक अपने पसंदीदा पार्षद का नाम सुझा सकते हैं। पत्नी व समर्थकों को जिताने की जिम्मेदारी आप विधायक अशोक पराशर पप्पी के विधानसभा क्षेत्र में 15 वार्ड हैं जिसमें 9, 30, 74, 75, 80, 78, 79, 82, 81, 10, 85, 84, 83, 77, 76 शामिल हैं। इन वार्डों में 11 विधायक के समर्थक चुनाव लड़ रहे हैं जबकि बाकी के 4 टिकट आप संगठन व पार्टी नेताओं के तय बनने के बाद दिए गए। विधायक पराशर की पत्नी मीनू पराशर वार्ड नंबर 94 से चुनाव लड़ रही है। विधायक पप्पी के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें अपनी प|ी मीना को चुनाव भारी अंतरों से जिताना तो है ही वहीं अपने समर्थकों की जीत के लिए भी मेहनत करनी है। अशोक पराशर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। विधानसभा 2022 में पप्पी को अपने विधानसभा क्षेत्र से 32707 वोट मिले थे, लेकिन इस बार लोकसभा में पप्पी को अपने गढ़ में 20039 वोट मिले हैं। बेटे के लिए मेयर की दावेदारी करेंगे आप विधायक मदनलाल बग्गा के विधानसभा क्षेत्र में 16 वार्ड है जिसमें वार्ड नंबर 1, 8, 86, 87, 88, 90, 91, 92, 93, 94, 95, 89, 66, 67, 68, 70 शामिल हैं। इनमें विधायक बग्गा के 12 करीबी समर्थकों को टिकट मिला है जबकि चार आप वर्करों को टिकट मिला है। नेताओं में सहमति बनने के बाद टिकट फाइनल हुए। इस चुनाव में विधायक बग्गा के बेटे अमन बग्गा वार्ड 94 से चुनाव लड़ रहे हैं। विधायक बग्गा के सामने बेटे अमन को चुनाव जीतना चुनौती है। उनके सामने जीत हार का अंतर भी बड़ा करने की चुनौती होगी। ताकि वह जीतने पर बेटे को मेयर बनाने की दावेदारी भी कर सकें। वहीं, अपनी विधानसभा से भी आप प्रत्याशियों को जिताना भी विधायक बग्गा के सामने चुनौतीपूर्ण होगा। 10 सीटों पर टिकट फाइनल करने में सिद्धू की चली आप विधायक कुलवंत सिद्धू के हलके में 12 वार्ड है जिसमें वार्ड 39, 40, 41, 42,43,44, 45,46,47, 48, 49,50 शामिल हैं। इसमें 10 सीटों पर टिकट फाइनल में विधायक सिद्धू की चली है जबकि बाकी सीट पर आप संगठन ने नेताओं से मंथन कर नाम तय किए हैं। कुलवंत सिद्धू के बेटे युवराज सिंह भी चुनावी मैदान में हैं, जो वार्ड नंबर 50 से बिगुल फंूक चुके हैं। विधायक कुलवंत के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेटे को जिताना है और उन आप प्रत्याशियों को जिताना भी है जिनके नाम उन्होंने तय किए हैं। यह इसलिए भी जरूरी है कि मेयर बनने की स्थिति में जिस विधायक के पार्षदों की संख्या अधिक होगी, उसके पसंदीदा नाम पर मोहर लग सकती है। उनके सामने ब्रैंस ब्रदर्स की भी चुनौती है जो विधायक सिद्धू की लगातार चुनावी रणनीति पर निगाह रखते हैं। गोगी ने 13 टिकट समर्थकों को दिलाए, टिकट न मिलने पर करीबी निर्दलीय खड़ा आप विधायक गुरप्रीत गोगी के विधानसभा क्षेत्र में 17 वार्ड हैं। इसमें से वार्ड 61 से विधायक गोगी की पत्नी डॉ. सुखचैन बस्सी चुनाव लड़ रही हैं। यहां वोटरों की संख्या 7268 है। इस वार्ड में विधायक गोगी के कहने पर टिकट का वितरण हुआ है। इसमें से 13 टिकट उन्होंने समर्थकों को दिलवाए हैं। साथ ही 4 टिकट आप वर्करों को दिए गए हैं। विधायक गोगी के सामने चुनौती ये है कि उनके करीबी सोनू बंगाली ने टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ी है और वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में वह आप प्रत्याशी की जीत का गणित बिगाड़ सकते हैं। विधायक की प|ी भी चुनाव लड़ रही हैं, ऐसे में विधायक ज्यादा समय अन्य वार्डों में नहीं दे पाएंगे।

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