अमृतसर | श्री दुर्गियाना मंदिर कमेटी प्रधान लक्ष्मीकांता चावला ने कहा अंग्रेजी राज्य के समय तत्कालीन सरकार ने अपने कर्मचारियों के गले में गुलामी का फंदा हर समय मजबूती से लटकाए रखने के लिए एसीआर अर्थात वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट का बुरा रिवाज चलाया था। हर कर्मचारी को यही डर रहता था कि न जाने उसका नजदीकी उच्चाधिकारी न जाने उसकी रिपोर्ट सरकार को कितनी बिगाड़कर भेज दे। शायद मंदिर गुरुद्वारे जाने पर भारत माता की जय कहने पर भी कर्मचारी को दंडित कर दिया जाए। इसी एसीआर के डर से कर्मचारी सही बात न कर पाते थे न कह पाते थे, पर अफसोस यह है कि भारत सरकार ने आजादी का अमृत महोत्सव तो मना लिया, पर कर्मचारियों को इस एसीआर के चंगुल से मुक्त नहीं करवाया। उन्होंने कहा कि मेरी भारत सरकार से अपील है कि यह एसीआर वाला फंदा अब स्वतंत्र भारत के कर्मचारियों के गले से निकाला जाए।


