पाली में एक टीचर का रिटायरमेंट गांव वालों ने यादगार बना दिया। स्कूल से 9 KM दूर टीचर के घर तक बंदौली निकाली। पूरे रास्ते स्टूडेंट और ग्रामीण DJ पर नाचते गाते हुए चले और उन्हें ससम्मान घर छोड़कर आए। ग्रामीणों ने JCB पर खड़े होकर टीचर की बंदौली पर फूल बरसाए। साथ ही टीचर को गिफ्ट में सोने की अंगूठी और 11 हजार केस भी दिया। और बोले कि हमारे बच्चों को आपने अच्छे से पढ़ाया। स्कूल विकास के लिए भी बहुत कुछ किया यह उसका इनाम है। यह सुनकर एक बार तो टीचर की आंखें भी नम हो गई। दरअसल पाली जिले के रोहट क्षेत्र के भाकरीवाला गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में रोहट क्षेत्र के सरदारसमंद फार्म के रहने वाले टीचर
दाऊलाल पुत्र सोहनलाल सैन का 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त हुए। भाकरीवाला गांव सहित आस-पास के 20 गांवों के लोगों ने प्रशासक अमराराम बेनीवाल के नेतृत्व में टीचर के सेवानिवृत्त समारोह को यादगार बनाने का फैसला किया।
घोड़े पर बिठाकर निकाली बिंदोली
ग्रामीणों ने टीचर दाऊलाल को स्कूल से घोड़े पर बिठाया और डीजे पर नाचते गाते हुए भाकरीवाला गांव से करीब 9 KM दूर सरदारसमंद फॉर्म उनके घर तक पैदल बंदौली निकालते हुए ले गए। ग्रामीणों ने फूलों की मालाओं से टीचर को लाद दिया। रास्ते में लोग देखते रह गए। किसी ने सोचा कि शादी समारोह को लेकर बिंदोली निकाली जा रही है। लेकिन जब उन्हें पता चला कि यह शादी की बंदौली नहीं सेवानिवृत्ति को लेकर आयोजन किया जा रहा है तो ग्रामीण भी टीचर की इस अनोखी विदाई को देखते रह गए। गिफ्ट में सोने की अंगूठी, 11 हजार
टीचर को उनके सेवानिवृत्ति समारोह में ग्रामीणों की ओर से आधा तोले की सोने की अंगूठी और 11 हजार रुपए नकद गिफ्ट में दिए गए। ग्रामीणों ने उनका धन्यवाद दिया कि उन्होंने बच्चों को अच्छे से पढ़ाया और स्कूल विकास के लिए भी बहुत कुछ किया। टीचर ने भी अपने सेवानिवृत्त समारोह के दौरान स्कूल विकास के लिए 51 हजार रुपए गिफ्ट किए। 38 लाख रुपए एकत्रित कर स्कूल का करवाया जीर्णोद्धार
टीचर दाऊ लाल ने बताया कि वे अविवाहित है। 28 मार्च 1992 में सरकारी नौकरी लगे थे। वर्ष 2013 से भाकरीवाला गांव के स्कूल में सेवाएं दे रहे थे और यहां 11-12वीं के स्टूडेंट को इतिहास विषय पढ़ाते थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने स्कूल के जर्जर भवन को देखते हुए अपनी जेब से एक लाख रुपए का बजट देकर जीर्णोद्धार कार्य करवाने की शुरुआत की थी। इसके साथ ही भामाशाहों को प्रेरित कर करीब 38 लाख रुपए का बजट एकत्रित किया था। जिससे स्कूल का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो सका। सेवानिवृत्त के समय वे स्कूल के उप प्राचार्या थे।


