बालाघाट में सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में 2 जनवरी को नगर कीर्तन निकाला गया। इस धार्मिक आयोजन में भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। गोंदिया से आए जत्थे ने शबद कीर्तन के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया, वहीं अमृतसर से आए वीरों ने गतका और शस्त्र विद्या अखाड़े का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। नगर कीर्तन की शुरुआत स्थानीय गुरुद्वारे से हुई। यह कीर्तन शहर के प्रमुख मार्गों हनुमान चौक, नया सराफा, महावीर चौक, राजघाट चौक, काली पुतली चौक और अंबेडकर चौक से होते हुए वापस गुरुद्वारे पहुंचा। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर कीर्तन का स्वागत किया। समापन के बाद गुरुद्वारे में लंगर की सेवा भी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रकाश पर्व के आगामी कार्यक्रम मुख्य प्रकाश पर्व 5 जनवरी को मनाया जाएगा, जिसके लिए विविध कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है: 3 जनवरी: सुबह 8 बजे अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ होगा। इस दौरान बच्चे गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन दर्शन पर आधारित विशेष प्रस्तुतियां देंगे। 4 जनवरी: सुबह से शाम तक विभिन्न हुजूरी जत्थों द्वारा शबद कीर्तन का प्रवाह चलेगा। 5 जनवरी: सुबह 8:30 बजे अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता होगी और 359वां प्रकाश पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। ‘आपे गुरु-आपे चेला’ की महिमा श्री गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हीरा सिंह भाटिया ने गुरु महाराज की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि उन्हें ‘दशमेश पिता’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने स्वयं गुरु होते हुए भी अपने शिष्यों को अमृतपान कराकर अपने बराबर सम्मान दिया, इसलिए उन्हें ‘आपे गुरु-आपे चेला’ कहा जाता है। उन्होंने धर्म, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अपने माता-पिता और चारों बेटों सहित स्वयं का बलिदान दिया था। आयोजन में शामिल रहे ये लोग नगर कीर्तन में सिख समाज और खालसा सेवादल के वीर बड़ी संख्या में शामिल हुए। इनमें प्रबंधक कमेटी अध्यक्ष हीरासिंघ भाटिया, उपाध्यक्ष हरमिंदरसिंघ अतालिया, नरेन्द्रसिंघ छाबड़ा, गुरूदयालसिंघ भाटिया, महेन्द्रपालसिंघ गांधी, गुरदीपसिंघ सौंधी, मनमीतसिंघ पसरिचा, हरमिंदरसिंघ कैथ, जसमीतसिंघ छाबड़ा, राज गांधी, अमरजीत कौर अतालिया, शीतल पसरिचा, महेन्दर कौर सचदेवा, सुरेंद्र पाल सिंह कौशल, सुरजीत सिंह छाबड़ा और दर्शन कौर सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।


