भास्कर न्यूज| महासमुंद जिले के युवा नौकरी पेशा से हट अब खेती को नया आयाम दे रहे हैं। महासमुंद के दूरस्थ गांव कुण्डापाली के शिक्षित युवा किसान बालमुकुंद नायक (35) ने बैंक की नौकरी छोड़ पुश्तैनी खेती को अपना व्यवसाय बनाया है। पारंपरिक खेती को उन्होंने नवाचारों से आधुनिकता की ओर बढ़ाया। अब वे नर्सरी में सब्जियों के पौधे तैयार कर हर महीने दो लाख रुपए की आय कमा रहे है। छग के विभिन्न जिलों समेत ओडिशा में भी इनकी नर्सरी में तैयार पौधों की मांग है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र के कुण्डापाली गांव के युवा किसान बालमुकुंद नायक ने पढ़ाई करने के बाद से निजी बैंक में लोन डिपार्टमेंट में नौकरी की। बाद बैंक से रिजाइन देकर खेती-किसानी को अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने बताया कि वे जब आठवीं कक्षा में थे तब से खेती किसानी करते आ रहे हैं। करीब डेढ़ से दो एकड़ में सब्जियों की खेती करते हैं। बैंक से मिलने वाली सैलरी को बालमुकुंद अपने सब्जियों की खेती में उपयोग करने लगे। साल 2021 में बैंक की नौकरी छोड़ने के बाद आधुनिक खेती कर अपना कॅरियर बनाने का निर्णय लिया। खेती से हुए आय से अब उनके पास खुद का ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्र भी हैं। उनका कहना है कि खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि विरासत है और इसका संरक्षण युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी भी है। उनका कहना है कि धान की खेती में देरी से मुनाफा होता है। सब्जी की खेती में अल्पकाल में अधिक मुनाफा मिलता है। इसमें पानी भी कम लगता है। साल 2018 में बालमुकुंद ने अपने दो एकड़ खेत में ड्रीप सिस्टम लगवाया और पारंपरिक को आधुनिक खेती में बदला। सरायपाली क्षेत्र में नदी वाले क्षेत्र से बाहर खेत में तरबूज- खरबूज का फसल लेने वाले वे पहले किसान है। वर्तमान में उन्होंने डेढ़ एकड़ क्षेत्र में करेला और शिमला मिर्च की फसल लगाई है और 50 हजार रुपए हर महीने मुनाफा कमा रहे हैं। बेरोजगार महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया बिहान समिति की महिलाएं जो गौठान योजना बंद होने के बाद रोजगार के लिए भटक रही थी वे अब बालमुकुंद के नर्सरी और खेत में काम कर रही है। करीब 12 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है। ये सभी रोजाना नर्सरी में बालमुकंद की मदद करती हैं।


