सम्मुख में कवियित्रियों ने किया रचनाओं का पाठ:मोनिका गौड़ और संतोषी देवी ने कविताओं में लाए स्त्री, प्रकृति और रिश्तों के भाव

ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन की पहल पर जवाहर कला केंद्र में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम “सम्मुख” में महिला कवियित्रियों ने अपनी अनूठी रचनाओं से साहित्य प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। सुजस आर्ट गैलरी में आयोजित इस कार्यक्रम में बीकानेर निवासी मोनिका गौड़ और संतोषी देवी ने अपनी कविताओं, गीतों और शायरियों के माध्यम से स्त्री, प्रकृति और सामाजिक मुद्दों के विभिन्न पहलुओं को उकेरा। मोनिका गौड़ ने हिंदी और राजस्थानी भाषा में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी कविता ‘स्त्री का रेखागणित’ ने स्त्री और पुरुष के संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा:”पुरुष! तुम जान नहीं सकतेमन की परिधि में धधकते भावों के बहाव को,रिश्तों के कोणों, त्रिज्याओं की चुभन से जूझती,खरोंचों को मुस्कान से छुपाती,बेलती है गोल रोटियां…”मोनिका की कविताओं में स्त्री की संवेदनाओं, संघर्षों और अस्तित्व के गूढ़ अर्थों को खूबसूरती से बयां किया गया। संतोषी देवी की कविताओं में प्रकृति और गांव की झलक संतोषी देवी ने प्रकृति, गांव और स्त्री के संघर्षों को केंद्र में रखकर कविताएं, गजल और शायरी सुनाईं। उनकी कविता ‘समय ले रहा है करवट’ में उन्होंने ग्रामीण औरतों के जीवन की वास्तविकताओं को शब्द दिए:”औरत, लीपती है आंगन, गोबर से लगाती है पैबंद।जाने-अनजाने में पड़ गए,पालतू जानवरों के खुर,और आंगन में छोड़ गए, अपने निशान।”उनकी रचनाओं में समाज में स्त्री के संघर्षों और अस्तित्व को गहराई से प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान के प्रमुख साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की। नंद भारद्वाज, लोकेश कुमार साहिल, राजेंद्र बोड़ा, फारुख आफरीदी, डॉ. राजेश कुमार व्यास, वर्षा शर्मा, ईश्वर दत्त माथुर, और राव शिवपाल सिंह जैसे गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह आयोजन राजस्थान फोरम और श्री सीमेंट के सहयोग से आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में स्त्री-संवेदनाओं और साहित्यिक अभिव्यक्तियों को मंच प्रदान कर उनकी आवाज को सशक्त बनाने का प्रयास किया गया।

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