विधानसभा:स्पीकर बोले- शेष 35% उत्तर भेजें, दोबारा बुलाने की नौबत न आए

विधानसभा में आगामी बजट सत्र को लेकर शुक्रवार को बड़ी कवायद चली। विधानसभा स्पीकर ने 60 अफसरों को तलब किया। उनको सख्त लेहजे में कहा- चौथे सत्र के ही 5803 हजार सवालों में से 35 फीसदी यानी 2031 के जवाब नहीं आए। पेंडेंसी बर्दाश्त नहीं होगी। सभी प्रमुख सचिवों को कहा कि विशेष शिविर लगा कर हर हाल में पेंडेंसी जीरो करो। 15 जनवरी तक सारे लंबित प्रश्नों के जवाब विधानसभा को पहुंचने चाहिए। ध्यानाकर्षण और विशेष उल्लेख प्रस्तावों के भी जवाब चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न हो कि दोबारा बुलाना पड़े। सभी विभाग गंभीरता से लंबित प्रश्नों के जवाब प्राथमिकता से भेजें। देवनानी ने विधानसभा में लम्बित प्रश्नों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों, विशेष उल्लेख प्रस्तावों, आश्वासनों एवं याचिकाओं के संबंध में राज्य सरकार के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की शुक्रवार को बैठक ली। इसमें ये निर्देश दिए। विभिन्‍न विभागों के अधिकारियों से रूबरू हुए और उनसे प्रश्नों के जवाब नहीं आने के कारणों की जानकारी भी ली। उन्‍होंने अधिकारियों से कहा कि प्रश्नकाल और चर्चा के दौरान वे पूरे समय विधान सभा की अधिकारी दीर्घा में ही उपस्थित रहें। 16वीं विधानसभा के एक तिहाई जवाब बाकी देवनानी ने बताया कि 16वीं विधान सभा के चौथे सत्र की समाप्ति के बाद अभी भी 35 प्रतिशत प्रश्नों के जवाब आने बाकी हैं जिनकी संख्‍या करीब 2031 है। सभी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने की विधानसभा द्वारा समय सीमा निश्चित की हुई है। ऐसे में विभिन्‍न विभागों द्वारा समय पर प्रश्नों का उत्तर नहीं भिजवाया जाना चिंता का विषय है। कुछ विभाग जवाब निर्धारित समय में भिजवाने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में अब किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देवनानी ने प्रश्नों के गलत जवाब देने के मामलों को भी गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए की भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो। कैम्प लगाकर कार्य निस्तारण करना चाहिए पेंडेंसी को गंभीरता से लेंगे : सीएस बैठक में मुख्‍य सचिव वी. श्रीनिवास ने विधानसभा अध्‍यक्ष को आश्वासन दिया कि उनके निर्देशानुसार सभी विभागों के शिविर लगाकर विधानसभा के लम्बित प्रश्नों को निर्धारित समयावधि में निस्तारण करवाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। आगे भी सभी विभाग विधानसभा के सभी निर्देशों को गंभीरता से लेकर समय पर अपने उत्तरदायित्वों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। बैठक में सोलहवीं एवं पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा के लम्बित प्रकरणों की स्थिति का विभागवार प्रस्तुतीकरण दिया गया। देवनानी ने कहा कि अधिकारी अपने विभाग के मंत्रियों और अधीनस्थ अधिकारियों के साथ समन्वय रखते हुए विधानसभा से संबंधित मामलों की इस तरह मॉनिटरिंग करें। लम्बित प्रश्नों के मामले में उन्हें भविष्य में ऐसी बैठक बुलाने की आवश्यकता न हो।संबंधित प्रश्नों के मामलों में सभी विभागों को कैम्प लगाकर युद्ध स्तर पर कार्य निस्तारण की कार्यवाही करना चाहिए। यदि इन मामलों के निस्तारण में कोई व्यावहारिक कठिनाई और कोई समस्या हो तो खुलकर बताएं। साथ ही समस्या के निराकरण के मार्ग भी सुझाएं ताकि समस्या का हल निकल सकें।

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