राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने साफ कर दिया है कि भाजपा काे देखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को समझने की भूल न करें। भाजपा या विश्व हिंदू परिषद या विद्याभारती, इन सबके काम का तरीका अलग है। संघ तो सिर्फ समाज सुधार के लिए काम करता है। ऐसे स्वयंसेवक तैयार करता है जो समर्पण के साथ समाज की गुणवत्ता ठीक करने में जुटते हैं। ट्रम्प टैरिफ के मसले पर उन्होंने कहा- स्वदेशी चीजों का ही इस्तेमाल करें, यदि विदेशी चीजों की जरूरत होगी तो शर्तों पर लेंगे, टैरिफ से भारत नहीं डरेगा। भागवत शुक्रवार को भोपाल में प्रमुखजन गोष्ठी में बोल रहे थे। भागवत शनिवार को समाज व संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बात करेंगे। भागवत ने कहा कि संघ की कार्यशैली को तभी अच्छे से समझा जा सकता है, जब उससे जुड़ा जाए। एक-दो साल काम किया जाए। इसके बाद ठीक लगे तो स्वयंसेवक बनें। आरएसएस के अंदर आने वाले मनमर्जी से आएं और जाएं। हम तो दोस्ती और सात्विक प्रेम के आधार पर काम करना चाहते हैं। शाखा में नहीं भी आ सकते तो स्वयंसेवकों के सहयोगी बनें। इस समय आरएसएस का शताब्दी वर्ष चल रहा है। आने वाले समय में संपूर्ण हिंदुओं को जोड़ने का लक्ष्य है। जिनके भी मन में राष्ट्रीयता का विचार है, उन्हें साथ लाना है। इसी साल 2026 में प्रतिनिधि सभा की बैठक में संघ के आगे के कामकाज का निर्णय होगा। आपके लिए ये काम भी बताए पांच बड़े मुद्दों पर चर्चा… कहा- टिकट मांगने की चेष्टा रखने वाले लोग संघ से दूर रहें 1 राजनीतिक स्वार्थ : टिकट मांगने की चेष्टा रखने वाले लोग दूर रहें, शुद्ध चरित्र के लोग ही संघ की शाखाओं में आएं और जुड़ें। समाज की बेहतरी के काम करें।
2 फास्ट फूड : परिवार में शाम को एक साथ बैठें, भोजन भी करें। कभी पिज्जा खा सकते हैं, लेकिन घर का भोजन ही सबसे स्वस्थ आहार है। 3 जेन जी: युवाओं व नई पीढ़ी को भारतीयता बताएं। चीन में युवाओं को दुनिया के नक्शे पर ड्रैगन उड़ता दिखाया जाता है। भारत की नई पीढ़ी सीखे, तभी देश आगे बढ़ेगा। 4 फैशन : इमरजेंसी में हिप्पी बाल रखने वालों का मुंडन किया गया था। समाज बदला था। घर में क्या माइकल जैक्सन का फोटो चाहिए या विवेकानंद का। फूहड़ फोटो घर से हटा दीजिए। 5 पाकिस्तान : पड़ोसी भारत के बाहर है। लेकिन 14 अगस्त 1947 तक कराची भारत में था। 15 अगस्त 1947 को एक लाइन खींची गई और वह बाहर हो गया। पड़ोस भारत ही तो है। भागवत ने बताया- देश में चार तरह के हिंदू, इन्हें याद दिलाना है… और इन्हें जोड़ना है पहले- ऐसे लोग जो गर्व से कहते हैं कि वे हिंदू हैं। दूसरे- वो लोग जो यह कहते हैं कि गर्व से क्या कहें? हैं तो हिंदू ही। तीसरे- जोर से मत बोलो, घर आओ तो हम बताएं कि हिंदू हैं। चौथे-भूल गए हैं कि वे हिंदू हैं। भुलक्कड़ बने भी रहना चाहते हैं।… हिंदू विरोधी ताकतें भी चाहती हैं कि भुलक्कड़ लोगों की संख्या बढ़े। जहां भी अशांति है, वहां या तो हिंदुओं की जनसंख्या कम है या हिंदुत्व का भाव कम है। संघ चारों हिंदुओं को जोड़ना चाहता है। परीक्षा में मानों 4 सवाल हैं। ऊपर वाले दो हिंदुओं से जुड़े सरल प्रश्न हैं, इसलिए पहले उन्हें जोड़ना है। बाद के दोनों कठिन सवाल आखिर में लिए जाएंगे। विकास के नाम पर पेड़ न काटें.. भोपाल में विकास के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई के बीच भागवत ने सबक दिया है कि देश को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि पेड़ों की कटाई न हो। पानी और पेड़ बचाने होंगे। सिंगल यूज प्लास्टिक भी बंद होना चाहिए। संघ के ये कार्यक्रम क्यों हो रहे?
भागवत ने कहा कि कठिन दौर के बावजूद संगठन निरंतर बढ़ा है। आगे भी इसके सतत संचालन के लिए लोगों को संघ की वास्तविक प्रकृति समझानी होगी। आरएसएस को लेकर हितैषी और विरोधियों का नैरेटिव गलत है। संघ न तो सर्विस संगठन है, न पैरामिलिट्री, बल्कि समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण पर काम करता है।


