इंदौर के भागीरथपुरा की घटना के बाद भी नगर निगम ग्वालियर के अफसरों की नींद नहीं टूट रही है। जबकि मैदानी हालात दिनों-दिन खराब होते जा रहे है। नाले-नालियों के अंदर डिस्ट्रीब्यूटर लाइनें (घरों तक कनेक्शन वाली लाइनें) शहरभर की अधिकांश कॉलोनी और मोहल्लों में डली हैं। जरा भी पाइप लीकेज होते ही गंदा पानी घरों के अंदर आए दिन पहुंच जाता है। शिकायतों के बाद भी सुनवाई नहीं होने के कारण सीएम हेल्पलाइन में 310 शिकायतें दर्ज है। वहीं मुख्यालय भोपाल से 59 गंदे पानी की शिकायतें निगम को मिली है। इनमें अधिकांश शिकायतें ऐसी हैं, जिनका निराकरण 6 माह में भी नहीं हुआ है। भास्कर रिपोर्टर ने शहर के अलग-अलग क्षेत्र में इंदौर जैसे हालात दिखे। गोलपहाडिय़ा से तिघरा रोड पर पानी की मुख्य लाइन तक सीवर चेंबर के अंदर से होकर निकल रही है। यह स्थिति तब है जब बीते वर्ष जून में अर्जुन नगर में 20 दिन गंदे पानी की सप्लाई से 50 घरों में सीवर युक्त पानी पहुंचा और 10 लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा था। इंदौर की घटना से हड़कंप, शिकायतों की रिपोर्ट मांगी इंदौर की घटना के बाद भोपाल मुख्यालय से गंदे पानी की लेकर मॉनीटरिंग की जा रही है। वहां से शुक्रवार को 59 शिकायतें ग्वालियर नगर निगम को पहुंचाई है। शिकायतें लंबित: वार्ड 9 के निवासी लोकेंद्र भदौरिया की शिकायत 6 माह से लंबित है, वार्ड 5 के फरीना सेन, वार्ड 41 के रोहित अलवानी और वार्ड 53 की अनीता सेन की शिकायत 3 माह से लंबित है। वहीं वार्ड 19 के अशोक शर्मा की शिकायत 2 माह से लंबित है। पानी लाइनें शिफ्ट करेंगे गंदे पानी की लेकर सीएम डा. मोहन यादव वीसी थी। उसमें प्रजेंटेशन था। जहां पुरानी लाइनें है। सीवर-पानी बगल-बगल चल रही हैं या अंदर है। उन्हें चिह्नित कर शिफ्ट करने का प्लान बनाया जाए। प्राथमिकता के हिसाब से पहले शार्ट टर्म प्लान पर काम करेंगे। फिर लॉग टर्म प्लान पर काम होगा। -संघ प्रिय, आयुक्त ननि


