जीवन में प्रगति के लिए कठिन संघर्ष और सामंजस्य जरूरी है : विकासानंद

सिटी रिपोर्टर | बोकारो आनंद नगर पुंदाग में आनंद मार्ग प्रचारक संघ के धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत प्रभात संगीत, बाबा नाम केवलम कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुई। मार्ग गुरु प्रतिनिधि आचार्य विकासानंद ने श्री आनंदमूर्ति के दर्शन पर आधारित आध्यात्मिक प्रवचन में कहा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति संघर्ष और सामंजस्य के माध्यम से ही संभव होती है। जहां संघर्ष नहीं, वहां गति नहीं और जहां सामंजस्य नहीं, वहां स्थायित्व नहीं। उन्होंने कहा कि जीवन ठहराव को स्वीकार नहीं करता, वह निरंतर रूपांतरण चाहता है। आचार्य ने स्पष्ट किया कि जब किसी कला या क्षमता के विकास की संभावनाएं सिमटने लगती हैं और वह अपने चरम बिंदु पर पहुंच जाती है, तो उसे पराकाष्ठा कहा जाता है। उस अवस्था में आगे कोई परिवर्तन संभव नहीं रहता और गति एक सीधी रेखा में चलने लगती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला प्राणी है। लक्ष्य के अभाव में किया गया सारा श्रम व्यर्थ हो जाता है। इसे समझाने के लिए नाव का उदाहरण अत्यंत सारगर्भित है। यदि कोई नाव चला रहा हो, पर उसे यह ज्ञात न हो कि उसे नाव को कहाँ ले जाना है, तो उसका समस्त प्रयास निष्फल सिद्ध होगा।आनंद मार्ग प्रचारक संघ की सांस्कृतिक शाखा, रेनेसां आर्टिस्ट्स एंड राइटर्स एसोसिएशन ने आज प्रभात संगीत पर आधारित एक सांस्कृतिक शाम का आयोजन किया। इस अवसर पर विभिन्न कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और आध्यात्मिक ज्ञान की बातें सुनीं। कार्यक्रम का संचालन आचार्य विकासानंद ने किया। उन्होंने सभी को आध्यात्मिक ज्ञान की बातें बताई। धर्म महासम्मेलन में लगभग 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए। देश, विदेश से आए हुए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। साथ ही विप्लवी विवाह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें आचार्य विनीत कुमार देव एवं वधू पक्ष से आनंद मार्ग की महिला पुरोहित अवधूतिका आनंद चित्रप्रभा आचार्या उपस्थित थी। इस मौके पर 15 जोड़ों का विवाह कराया गया।

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