“एक महीने में SIR हो सकती है,जातिगत जनगणना क्यों नहीं”:सांसद चंद्रशेखर बोले-बीजेपी ने मोहन को सीएम बनाया, अब उन्हें हटाने की साजिश हो रही

नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भोपाल के सिंधु भवन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सत्ता, संविधान और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर समाज ने अपनी ताकत नहीं बनाई, तो रोज कोई अपमानजनक शब्द बोलेगा और लोग मुकदमा कराने के लिए भटकते रहेंगे, लेकिन हालात नहीं बदलेंगे। आजाद पिछले दिनों भोपाल के सिंधु भवन में आयोजित आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं की बैठक में शामिल हुए थे।
जातिगत जनगणना से डर क्यों? सरकार को खुली चुनौती आजाद ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि जातिगत जनगणना करा ली जाए, तो एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी की आबादी 90 प्रतिशत के आसपास निकलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव आयोग एक महीने में सौ करोड़ लोगों की एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कर सकता है, तो 11-12 साल में जातिगत जनगणना क्यों नहीं हो पा रही। कभी बजट का बहाना, कभी समय की कमी, ये सिर्फ टालने के तरीके हैं। 1931 से मंडल तक: पिछड़ों के साथ हुआ धोखा चंद्रशेखर आजाद ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि 1931 की जातिगत जनगणना में मध्यप्रदेश में पिछड़ा वर्ग 52 प्रतिशत था। इसके बाद काका कालेलकर आयोग की रिपोर्ट को कांग्रेस सरकार ने डस्टबिन में डाल दिया। मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के समय भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया। आज भी मंडल आयोग की 38 सिफारिशें लंबित हैं, जिनके लागू होने से पिछड़े वर्गों को बड़ा लाभ मिल सकता है। पिछड़ा मुख्यमंत्री, लेकिन सम्मान नहीं उन्होंने कहा कि सरकारें पिछड़ा विरोधी हैं। संख्या के दबाव में पिछड़ा वर्ग का मुख्यमंत्री तो बना दिया जाता है, लेकिन सम्मान नहीं दिया जाता। शिवराज सिंह चौहान के समय संगठन विशेष द्वारा मां-बहन की गालियां दी गईं। अब मोहन यादव मुख्यमंत्री बने तो उनसे वैचारिक विरोध अलग बात है, लेकिन 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की बात करते ही उन्हें हटाने की कोशिशें और जातिगत गालियां शुरू हो गईं। इससे साफ है कि पिछड़े वर्ग का असली सम्मान किस पार्टी में है। कांशीराम आंदोलन की याद दिलाई चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जब कांशीराम साहब के नेतृत्व में पिछड़ा आंदोलन चला था, तब मध्यप्रदेश से तीन निर्दलीय सांसद बने थे। इनमें सुखलाल कुशवाह, बुद्धसेन पटेल और भीमसेन पटेल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जब कमजोर वर्ग एकजुट होता है, तभी राजनीतिक बदलाव आता है। एसआईआर के नाम पर 2.98 करोड़ वोट कटे उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए 2.98 करोड़ वोट काट दिए गए। तुलना करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया की पूरी आबादी 2 करोड़ 80 लाख से कम है, लेकिन उससे ज्यादा वोट सिर्फ उत्तर प्रदेश में काट दिए गए। जबकि एक-डेढ़ साल पहले इन्हीं वोटर लिस्ट पर चुनाव कराए गए थे। इसका मतलब साफ है कि कमजोर वर्गों के वोट योजनाबद्ध तरीके से छीने जा रहे हैं। EWS का लाभ लेने वाले कर रहे आरक्षण का विरोध चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर द्वारा दिए गए आरक्षण का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जो पिछले 5-6 सालों से खुद ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। यह सीधा-सीधा संविधान और सामाजिक न्याय के साथ पाखंड है। आदिवासी IAS की नहीं सुन रहे, तो गरीब की कौन सुनेगा चंद्रशेखर आजाद ने आईएएस संतोष वर्मा का नाम लिए बिना कहा कि जब एक आदिवासी आईएएस अधिकारी की आवाज और सच्चाई को अनसुना किया जा रहा है, तो आम गरीब आदमी की बात कौन सुनेगा। इससे साफ समझा जा सकता है कि आज देश के हालात क्या हैं और व्यवस्था किस दिशा में जा रही है। देश भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी की ओर देख रहा उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात में देश का वंचित समाज (एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक) अब भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी की तरफ उम्मीद से देख रहा है। उन्होंने कहा कि जब सब दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब लोग एक मजबूत विकल्प की ओर देखते हैं। ईसाई समाज पर हमले,धार्मिक आजादी छीनी जा रही आजाद ने कहा कि भारत में रहने वाले ईसाई जब क्रिसमस जैसा त्योहार मना रहे हैं, तो कहीं उन्हें डंडों से पीटा जा रहा है, कहीं कैप पहनने पर भगा दिया जा रहा है और कहीं चर्चों में घुसकर मारपीट की जा रही है। संविधान के अनुच्छेद 25 में धार्मिक आजादी दी गई है, लेकिन ईसाई समाज आज यह सवाल कर रहा है कि वह अपनी पीड़ा किससे कहे। उन्होंने कहा कि आज ईसाई समाज भी हमारी पार्टी की तरफ उम्मीद से देख रहा है और हम उनकी सुरक्षा करेंगे। मुस्लिम समाज के खिलाफ डर का माहौल चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज के खिलाफ खुलेआम नफरत फैलाई जा रही है। तलवारें बांटी जा रही हैं, लोगों को उकसाया जा रहा है और ‘काट दो’ जैसे नारे लगवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज डर का ऐसा माहौल है कि कोई बोलना नहीं चाहता। नेता चुप हैं और सत्ता में बैठे कई अच्छे लोग भी आंख-कान बंद किए बैठे हैं। कानून सबके लिए बराबर क्यों नहीं? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आम आदमी तलवार बांटे तो उसी दिन मुकदमा दर्ज हो जाएगा और एनएसए लगा दी जाएगी, लेकिन जो लोग खुलेआम तलवारें बांट रहे हैं, वे टीवी चैनलों पर इंटरव्यू दे रहे हैं। आज यह अन्याय किसकी शह पर हो रहा है और इसकी ताकत कौन बढ़ा रहा है, यह देश को सोचना होगा। संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि संविधान का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। एक बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जब उन्होंने इस पर सवाल उठाया, तब जाकर जांच शुरू हुई। उन्होंने कहा कि अगर आवाज न उठाई जाए, तो अन्याय को ही सामान्य बना दिया जाता है। समाज को ताकत का एहसास नहीं चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि कुर्सी की अहमियत वही समझता है, जो अपनी ताकत को पहचानता है। गुलाम मानसिकता वाला समाज खड़े रहने में ही गौरव महसूस करता है, जबकि स्वाभिमानी समाज सत्ता की कुर्सी पर बैठने का हक समझता है। संविधान में एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए व्यवस्था की गई है, लेकिन जो चीज मुफ्त में मिल जाती है, उसकी कद्र नहीं की जाती।

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