गरियाबंद में राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी ममता यादव ने अपनी मेहनत और नवाचार से परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। मैनपुर ब्लॉक के सिहारलटी गांव की रहने वाली ममता ने गन्ने के रस से शुद्ध देशी गुड़ बनाकर एक सीजन में सवा लाख रुपये कमाए हैं। ममता यादव 2017 से ‘बिहान’ (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी हैं। उन्होंने तीन बार में कुल 90 हजार रुपये का ऋण लिया। शुरुआत में सेंट्रिंग प्लेट के काम से आमदनी हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने पति जगराम के साथ कृषि कार्य में हाथ बंटाया और गन्ने का उत्पादन शुरू किया। देशी जुगाड़ से गन्ने का रस निकाला आधे एकड़ जमीन पर गन्ना उगाने के साथ ही इस किसान परिवार ने गुड़ बनाने का व्यवसाय भी शुरू किया। पारंपरिक तरीके से मवेशियों द्वारा घानी चलाने का खर्च अधिक होने के कारण उन्होंने एक किफायती देशी जुगाड़ अपनाया। पति जगराम ने अपनी बाइक को रस्सी से घानी से बांधकर गन्ने का रस निकालने का काम शुरू किया। इस प्रक्रिया में ममता घानी को सहारा देती हैं, जबकि उनके पति पांच में से दो छोटे बच्चों को बाइक पर बिठाकर उसे चलाते हैं। स्कूल से लौटने के बाद दो बड़े बच्चे भी गन्ना पेराई के काम में मदद करते हैं। परिवार की सबसे छोटी सदस्य, एक दुधमुंही बच्ची भी उनके साथ रहती है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने 2018 में 35 लाख रुपये का ऋण देकर 700 मजदूर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा था। आज 600 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की 6 हजार से ज्यादा महिलाओं को 12 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया जा चुका है, जिससे 3 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। शुद्ध देशी गुड़ से परिवार की कमाई शुद्ध देशी गुड़ का काम एक सीजन में 20-25 दिन तक चलता है। रोजाना करीब 75 किलो गुड़ तैयार होता है। रोज़ाना खर्च में बाइक का पेट्रोल 400 रुपये और गन्ना काटने और मजदूर के लिए 800–1000 रुपये लगते हैं। इसके बाद रोजाना 7–8 हजार रुपये की गुड़ बिक्री होती है। 25 दिन में कुल बिक्री लगभग 2 लाख रुपये की हो जाती है, जबकि खर्च लगभग 35 हजार रुपये आता है। आधा एकड़ गन्ने की खेती तैयार करने में 50 हजार का खर्च एक बार लगता है, लेकिन खेती 4 बार होती है। ऐसे में एक सीजन में खेती का खर्च लगभग 15 हजार रुपये होता है। इस तरह, गुड़ की खेती से एक सीजन में परिवार करीब सवा लाख रुपये से ज्यादा कमा सकता है। देशी तरीके से तैयार गुड़ यह गुड़ पूरी तरह देशी और केमिकल-मुक्त होता है। रस को बड़े कढ़ाई में 3 घंटे तक उबालकर गाढ़ा किया जाता है और फिर लकड़ी के डोंगे में ठंडा किया जाता है। ममता के खलिहान से शुद्ध गुड़ 120 रुपये प्रति किलो मिल जाता है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 130–150 रुपये होती है। महिलाओं की आजीविका और लखपति दीदियां जिले में 10,833 महिलाओं को आजीविका मिशन से जोड़ा गया है, जिनमें से 3,000 से ज्यादा महिलाएं साल में 1 लाख रुपये से अधिक कमाकर लखपति बन गई हैं। पहले ये महिलाएं सिर्फ मजदूरी करती थीं, लेकिन अब स्वरोजगार से वे खुद मालिक बन गई हैं। अमलीपदर क्लस्टर में 6,000 से ज्यादा महिलाओं को 12 करोड़ रुपये से अधिक का लोन देकर किराना, मछली उत्पादन, मसाला, पापड़, फिनाइल, सब्जी बाड़ी, जैविक खेती जैसे कामों में जोड़ दिया गया। अब महिलाएं पुरुषों के साथ मुकाबला कर रही हैं और आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।


