फिंगेश्वर में कृषि महाविद्यालय स्थल विवाद पर प्रदर्शन:लोगों ने तीन दिन तक धरना के बाद 12 घंटे किया चक्का जाम, आधी-रात कलेक्टर-विधायक पहुंचे

गरियाबंद के फिंगेश्वर में कृषि महाविद्यालय के भवन निर्माण स्थल को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। संघर्ष समिति के नेतृत्व में नागरिकों ने तीन दिनों तक धरना प्रदर्शन और बंद का आयोजन किया, जिसमें 12 घंटे का चक्का जाम भी शामिल था। प्रदर्शन को समाप्त कराने के लिए आधी रात को कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और क्षेत्रीय भाजपा विधायक रोहित साहू को मौके पर पहुंचना पड़ा। यह विरोध 14.12 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले कृषि महाविद्यालय के स्थल चयन को लेकर था। संघर्ष समिति के अध्यक्ष भगवत हरित के अनुसार, यह महाविद्यालय रमन सरकार के कार्यकाल में 2017 में फिंगेश्वर के नाम से स्वीकृत हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2019 में इसका उद्घाटन किया था और तब से यह फिंगेश्वर आईटीआई भवन में संचालित हो रहा है। समिति का आरोप- विधायक नहीं चाहते फिंगेश्वर में विद्यालय बने हरित ने बताया कि भवन निर्माण के लिए 106 एकड़ भूमि पहले ही चिन्हांकित की गई थी, लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर किरवाई में स्थल का चयन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक रोहित साहू नहीं चाहते कि विद्यालय फिंगेश्वर में बने, जिसके कारण कलेक्टर ने भी कृषि विद्यालय प्रबंधन पर दबाव डालकर फिंगेश्वर के स्थल को अनुपयुक्त बताया। हरित ने यह भी कहा कि प्रशासन से बार-बार आग्रह करने के बावजूद उनकी मांगों को अनसुना किया गया, जिसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है। फिंगेश्वर संघर्ष समिति ने नागरिकों की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि फिंगेश्वर अब केवल नाम का मुख्यालय रह गया है। समिति के अनुसार, फिंगेश्वर में न तो तहसील कार्यालय खुला, न एसडीएम कार्यालय और न ही मंडी। अब महाविद्यालय के स्थल को भी कथित तौर पर साजिश के तहत बदला जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि महाविद्यालय और भूमि विवाद पर अपडेट भागवत हरित ने कहा कि आधी रात विधायक रोहित साहू की मौजूदगी में कलेक्टर भगवान सिंह उइके से बात हुई है। उन्होंने बताया कि अगले एक हफ्ते में दिखाए गए भूमि का परीक्षण किया जाएगा। साथ ही उन्होंने महाविद्यालय फिंगेश्वर और अनुसंधान केंद्र किरवाई में भी विकल्प दिया है। अगर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। किरवाई स्थल का विरोध क्यों? किरवाई फिंगेश्वर स्थल ब्लॉक मुख्यालय से केवल 8 किलोमीटर दूर है और यही ब्लॉक और विधानसभा क्षेत्र आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फिंगेश्वर के साथ अन्य प्रमुख संस्थानों के स्थल चयन में भेदभाव हुआ। आरोप है कि स्थल चयन में पूर्व कुलपति का अपने क्षेत्र को प्राथमिकता देना और कलेक्टर द्वारा बार-बार गुमराह करना, साथ ही कृषि विद्यालय प्रबंधन द्वारा दबाव बनाना, विवाद की वजह बना। विधायक ने कहा- फिंगेश्वर में भवन बनेगा अगर स्थल उपयुक्त हो विधायक रोहित साहू ने कहा कि मंजूरी मिलने के बाद भी भवन विहीन विद्यालय का मुद्दा उन्होंने बजट सत्र में उठाया और अब भवन की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर फिंगेश्वर स्थल उपयुक्त लगे तो भवन वहीं बनेगा। उनके अनुसार, स्थल से ज्यादा काम और मेहनत मायने रखती है। फिंगेश्वर संघर्ष और किरवाई बचाओ समिति में टकराव पिछले 10 महीने से स्थल को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। शुक्रवार को यह आंदोलन उग्र हो गया। लगातार फिंगेश्वर संघर्ष समिति के विरोध के बीच किरवाई स्थल बचाओ समिति ने प्रशासन द्वारा चयनित स्थल पर भवन निर्माण की मांग शुरू कर दी। इसके बीच कृषि विश्वविद्यालय ने मंजूर राशि को वापस करने की बात भी छेड़ी। अब जिले के विकास कार्य को रोकने से बचने पर विचार करने की जरूरत है। सैनिक विद्यालय का आबंटन कृषि महाविद्यालय विवाद के बीच अब सैनिक विद्यालय के लिए जमीन आबंटन का मामला सामने आया है। शासन ने इसके लिए 70 एकड़ भूमि मांगी है। जिला प्रशासन को पूरे जिले के पांच अनुविभागों से जानकारी लेनी चाहिए थी, लेकिन केवल राजिम एसडीएम से संपर्क किया गया। राजिम एसडीएम ने स्थल तलाश को सीमित कर दिया है। इसलिए आने वाले दिनों में जमीन आबंटन विवाद से बचाने के लिए चयन प्रक्रिया को सही तरीके से आगे बढ़ाना जरूरी है।

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