झुंझुनूं में 6 दिन से धरने पर बैठे किसान:ब्लास्टिंग से घरों में दरारें और गिरते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

गुढ़ागौड़जी क्षेत्र के ग्राम हुकुमपुरा, बामलास, खेदड़ों की ढाणी और खरबासों की ढाणी में चल रहे अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। कड़कड़ाती सर्दी के बावजूद ग्रामीण पिछले 6 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं, लेकिन प्रशासन मौन साधे हुए है। मरुसेना के एडवोकेट जयन्त मूंड ने कहा कि खानों में हो रही भारी ब्लास्टिंग के कारण आसपास के गांवों के घरों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खनन के कारण क्षेत्र का भू-जल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर गया है। धूल के कणों की वजह लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। आर-पार की लड़ाई के मूड में किसान मूंड ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसान और पर्यावरण प्रेमी 6 दिनों से धरने पर हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक उनकी सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। धरने को संबोधित करते हुए पूर्व सरपंच (गुढ़ा बावनी) दारासिंह मेघवंशी ने कहा कि खनन माफियाओं ने न केवल पहाड़ियों का स्वरूप बिगाड़ दिया है, बल्कि वे प्राकृतिक संसाधनों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। चार गांवों की जनता इस अवैध गतिविधि से परेशान है और अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। प्रमुख रूप से सवाई सिंह, लीलाधर मीणा, कैप्टन विनोद सिंह, मनोज शर्मा, मोनम कुमावत, अब्दुल कायमखानी, नवीन, हरिराम सीथल, प्रदीप यादव, इंस्पेक्टर बीरबल राम, कजोड़मल, भादर बिजारणियां और नरेश सिंह मौजूद रहे। साथ ही बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहे। शिमला देवी, जीवनी देवी, सिलोचना देवी और सुमन देवी शामिल थीं। इनके अलावा पूरन मीणा, बनवारी लाल, आनंद सिंह, लालचंद मीणा, मुकेश सोहु, सुरेश खेदड़, रघुवीर बिजारणियां, सुरेन्द्र सिंह, कैप्टन उम्मेद सिंह, पूरन कांटीवाल और अशोक शर्मा सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने एक स्वर में अवैध खनन बंद करने की मांग की।

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