राजगढ़ जिले में नकली खाद का मामला सामने आने के बाद राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इसे किसानों के साथ सीधा धोखाधड़ी का मामला बताते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव से उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की। 30 दिसंबर को लिखे पत्र के अनुसार, सिंह का कहना है कि यह प्रकरण केवल एक दुकान या एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में नकली खाद के संगठित नेटवर्क की ओर इशारा है। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि राजगढ़ जिले के ग्राम नाईपुरिया में किसानों को सिंगल सुपर फास्फेट के नाम पर ऐसी खाद बेची गई, जिसमें रेत की मात्रा अधिक और जरूरी पोषक तत्व नाममात्र के पाए गए। इससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीण दौरे के दौरान पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी को किसानों ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद कृषि विभाग के अधिकारियों को बुलाकर मौके पर पंचनामा किया गया। लाइसेंस निरस्त लेकिन सवाल बाकी
किसानों की शिकायत के बाद ब्यावरा स्थित ‘मध्यप्रदेश किसान बीज भंडार’ पर छापा मारा गया। जांच में खाद अमानक पाई गई, जिसके बाद संबंधित फर्म का पंजीयन निलंबित कर उर्वरक विक्रय का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि दुकानदार किसानों से खाद की बोरियां 400 से 500 रुपए अधिक कीमत पर बेच रहा था और बिना रसीद के लेनदेन कर रहा था। मामले में 7 नवंबर 2025 को उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन दिग्विजय सिंह का आरोप है कि कार्रवाई अभी अधूरी है और असली दोषियों तक प्रशासन नहीं पहुंच पाया है।
सरकारी लैब की रिपोर्ट में खाद अमानक
कृषि विभाग ने जब्त खाद के नमूने जबलपुर स्थित फर्टिलाइजर क्वालिटी कंट्रोल लैब भेजे थे। 15 दिसंबर 2025 को आई रिपोर्ट में सुपर फास्फेट खाद को अमानक घोषित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे आवश्यक तत्व बेहद कम मात्रा में पाए गए। इसके बावजूद गुणवत्ता को लेकर नई एफआईआर दर्ज न होने पर दिग्विजय सिंह ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस खाद की बोरियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और किसानों के लिए संदेश छपा है, वही खाद किसानों को ठगने का माध्यम बन रही है। इससे किसानों का भरोसा टूट रहा है और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है। निर्माता कंपनी पर कार्रवाई की मांग
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि संबंधित दुकानदार के पास सुपर फास्फेट बेचने का लाइसेंस तक नहीं था, फिर भी खुलेआम बिक्री की जा रही थी। दुकानदार के बयान के अनुसार खाद भोपाल स्थित निर्माता कंपनी ‘कोरामंडल इंटरनेशनल लिमिटेड’ के स्टॉक से खरीदी गई थी। पूर्व विधायक द्वारा कराई गई निजी प्रयोगशाला की जांच में भी खाद गुणवत्ताविहीन पाई गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि कोरामंडल इंटरनेशनल लिमिटेड के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर उसके साथ किया गया शासकीय अनुबंध निरस्त किया जाए। साथ ही नकली खाद खरीदने वाले किसानों को मुआवजा देने और पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर सभी जिलों में सुपर फास्फेट खाद की जांच कराने की भी मांग की गई है। किसानों में नाराजगी, सरकार की भूमिका पर सवाल
नकली खाद के इस मामले को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। एक ओर सहकारी समितियों में खाद की कमी है, वहीं दूसरी ओर निजी दुकानदार मनमानी कीमतों पर नकली खाद बेचकर किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी स्तर पर दोषियों को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।


