राजगढ़ जिले में शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को सख्त कर दिया है। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने सभी नगरीय निकायों में पानी की टेस्टिंग प्रति सप्ताह अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचाना है। शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में कलेक्टर ने सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को तीन दिन के भीतर वाटर सप्लाई प्लांट का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूषित पानी की शिकायत कहीं से भी प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वाटर टेस्टिंग किट का प्रशिक्षण दिलाने के आदेश
कलेक्टर ने सभी नगरीय निकायों की पाइपलाइन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को जियो-टैग करने के निर्देश दिए। इससे जल आपूर्ति व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी बेहतर होगी। साथ ही, प्रत्येक नगरीय निकाय से सप्लाई प्रभारी और सब इंजीनियर सहित पांच कर्मचारियों को चयनित कर रविवार को जिला स्तर पर पीएचई विभाग द्वारा वाटर टेस्टिंग किट का प्रशिक्षण दिलाने के आदेश भी दिए गए, ताकि नगर निकाय स्वयं भी पानी की नियमित जांच कर सकें। बैठक में अनुपस्थित रहने पर छापीहेड़ा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। वहीं, कलेक्टर ने ई-पीएचई विभाग को सभी ग्रामीण जल स्रोतों का निरीक्षण कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए।


