श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के मामले में गिरफ्तार सतेंद्र सिंह कोहली के वकील एवं एसजीपीसी के वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका ने कहा है कि पंजाब सरकार सिखों के धार्मिक मामलों में दखलंदाजी कर श्री अकाल तख्त साहिब की प्रभुसत्ता को गंभीर चुनौती दे रही है। कोर्ट परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सिख संस्था एसजीपीसी तथा अन्य संगठन अकाल तख्त की प्रभुसत्ता की रक्षा के लिए कोई भी लड़ाई लड़ने तथा बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि एक वकील होने के नाते किसी भी व्यक्ति को कानूनी सहायता देना उनका संवैधानिक अधिकार एवं कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि कोहली का मामला फौजदारी मुकदमा नहीं है और यह आपराधिक श्रेणी में नहीं आता है। कोहली के वेतन से 75% रिकवरी करने के लिए अकाल तख्त की तरफ से स्पष्ट आदेश दे दिए गए थे। कोहली ने जून 2020 में इस मामले में सिंह साहिबान के आदेश के तहत संवैधानिक तौर से सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के तहत जवाब दाखिल कर दिया था, जिसके बाद अकाल तख्त के सिंह साहिबान ने जवाब पर संतोष जताते हुए इस पर मोहर लगा दी थी। उन्होंने कहा कि सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के तहत एसजीपीसी एक स्वतंत्र धार्मिक संस्था है, इस पर भारतीय दंड संहिता की धाराएं नहीं लगाई जा सकती हैं। ऐसा करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई इस लड़ाई को लड़ने के लिए सभी सिख समुदाय को एकजुट होने की आवश्यकता है। सभी को अकाल तख्त की प्रभुसत्ता की रक्षा के लिए एक साथ खड़े होकर सरकार के इस अत्याचार का मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय अपने सिद्धांतों, परंपराओं एवं मर्यादा की रक्षा करने में खुद सक्षम है। अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक अदालत है, इसलिए सरकार को गैर-कानूनी तरीके से आरोपी पूर्व 16 अधिकारियों को दंडित करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने समस्त सिख समुदाय से अपील की कि वे अकाल तख्त की प्रभुसत्ता की रक्षा के लिए एकजुट होकर सरकार के इस कदम का मुकाबला करें। उन्होंने यह भी दोहराया कि एक वकील होने के नाते किसी भी व्यक्ति को कानूनी सहायता देना उनका संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है।


