भास्कर न्यूज | कोरबा धान की फसल कटाई के बाद मनाया जाने वाला छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व छेरछेरा शनिवार को शहरी क्षेत्र सहित गांव-गांव में पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान शहर की गलियों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक लोक संस्कृति की छटा देखने को मिली। पर्व के दौरान छोटे-छोटे बच्चों के समूह ने हाथों में थैली लेकर घर-घर पहुंचे और परंपरागत रूप से छेरछेरा… छेरछेरा कहते हुए दान में चावल, धान, पैसे व अन्य सामग्री इकट्ठा करते नजर आए। बुजुर्गों और युवाओं ने एक-दूसरे को छेरछेरा पर्व पर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। छेरछेरा पर्व दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को अन्न दान करते हैं, जिससे समाज में समानता और सद्भाव की भावना मजबूत होती है। शहरी क्षेत्र में भी इस लोकपर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला और लोगों ने परंपराओं को जीवंत रखते हुए पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया।


