उत्तर-पश्चिम बांग्लादेश और उससे सटे पश्चिम बंगाल के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन से एक बार फिर मौसम बदलने लगा है। झारखंड में पश्चिमी हवाओं की वजह से न्यूनतम तापमान में एक बार फिर गिरावट आएगी। इससे राज्यभर में ठंड का असर दिखेगा। शनिवार से ही इसकी शुरुआत हो गई। अधिकतर जिलों में अधिकतम तापमान में गिरावट होने से दिन में ही ठंड का अहसास होने लगा। रात के तापमान में रविवार से गिरावट आने की संभावना है। मौसम केन्द्र रांची के निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में अगले 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान में किसी प्रकार के बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। लेकिन इसके बाद अगले तीन दिन के दौरान न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री तक गिरावट आने की संभावना है। रांची सहित राज्य के 15 जिलों में 4 और 5 जनवरी को घने कोहरे का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इससे सुबह में एनएच और स्टेट हाईवे पर वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा हवाई और रेल सेवा पर भी असर दिख सकता है। इधर, पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान चाईबासा का 26.8 डिग्री और सबसे कम न्यूनतम तापमान गुमला का 6.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 6 जनवरी से खुलेंगे स्कूल, बच्चों को होगी परेशानी रांची सहित राज्यभर के सरकारी स्कूल 6 जनवरी से खुल जाएंगे। कई निजी स्कूल भी छह और सात जनवरी से खुलेंगे। इस दौरान न्यूनतम तापमान में गिरावट से ठंड बढ़ने की संभावना जताई गई है। ऐसे में स्कूली बच्चों को ठिठुरन वाली ठंड में ही स्कूल जाना होगा। ऐसे में स्कूलों में अवकाश का समय नहीं बढ़ा तो बच्चों की परेशानी बढ़ेगी। रांची सहित राज्य के 12 जिलों में शनिवार को दिन के तापमान में जबर्दस्त गिरावट आई। डालटनगंज में दिन के अधिकतम तापमान में सबसे अधिक 3.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जो सामान्य से 2.1 डिग्री कम है। इसके बाद लोहरदगा में दिन के तापमान में 2.9 डिग्री, रांची में 2 डिग्री, गुमला में 1.5 डिग्री, लातेहार में 1.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। दिन के तापमान में गिरावट होने से कनकनी बढ़ गई है। सुबह में धुंध की वजह से विजिबिलिटी काफी कम हो गई। देवघर में सबसे कम 450 मीटर, जमशेदपुर में 600 मीटर विजिबिलिटी दर्ज की गई। रात में पाला पड़ने की संभावना, नर्सरी को ढंककर रखें उत्तर पश्चिम की हवाएं पंजाब, उत्तर प्रदेश होते हुए झारखंड एवं बिहार के मैदानी भागों तक पहुंच रही है। इस वजह से तापमान में गिरावट आएगी। अगले कुछ दिनों तक कोहरे का प्रकोप रहेगा, लेकिन पहले से थोड़ा कम रहेगा। यदि कोहरा कम होगा और उत्तर पश्चिम की हवाएं तेज होगी तो रात में पाला पड़ सकता है। यह फसलों के लिए ज्यादा घातक है। आलू, सरसों, चना, धनिया, मेथी, लहसुन एवं अन्य सब्जियों के लिए नुकसानदायक है। यह मौसम नर्सरी के पौधों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसलिए रात में नर्सरी को पॉलिथीन या पुआल से ढक कर रखें। फसलों में सिंचाई कर नमी बनाए रखें। पाला पड़ने की अवस्था में सल्फर 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। हालांकि, ऐसा मौसम गेहूं एवं जौ के लिए लाभप्रद है। क्योंकि ऐसे मौसम में गेहूं और जौ जैसी फसलों में कल्लों की संख्या बढ़ती है।- अशोक कुमार,रिटायर्ड एसोसिएट डीन, बीएयू


