ज्यादा उम्र के नागरिकों को ज्यादा टारगेट करते हैं साइबर अपराधी : ओमप्रकाश

भास्कर न्यूज | टोंक डिजिटलाइजेशन के इस युग में जहां किसी भी प्रकार का काम फटाफट होने से आमजन को सहूलियत मिल रही है। वहीं दूसरी ओर थोड़ी सी लापरवाही का फायदा उठाकर साइबर फ्रॉड (अपराधी) लोगों की कमाई को चंद मिनटों में ही साफ कर देते हैं। राजस्थान में भी हजारों लोग साइबर अपराधियों की जालसाजी का शिकार हो रहे हैं। अकेले अजमेर रेंज में पिछले साढ़े 12 माह के भीतर ही 141 करोड़ से ज्यादा ठगी हो चुकी है। बढ़ती साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं को देखते हुए राजस्थान पुलिस आमजन को सावधान व जागरुक करने के लिए अभियान चला रही है। आईजी अजमेर ओमप्रकाश ने टोंक एसपी ऑफिस में प्रेसवार्ता में बताया कि साइबर क्राइम राजस्थान ही नहीं पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है। पुलिस मुख्यालय की ओर से चलाए जा रहे अभियान में साइबर क्राइम ने केसेज में आरोपी लोगों को ट्रेस कर, उनपर इनाम घोषित करना और उन्हें पकड़ने की कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि ज्यादा मामलों में साइबर अपराधी अधिक उम्र के नागरिकों को टारगेट करते हैं। उनके मंदिर या पार्क में जाते समय ठगी की वारदात करते हैं। वही स्कूल कॉलेज में अवेयरनेस रहती है। टोंक जिले में भी थाना स्तर पर अवेयरनेस कैंपेनिंग चल रही है। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी तक के आंकड़ों के अनुसार करीब 138 करोड़ साइबर फ्रॉड अकेले अजमेर रेंज में ही हुआ है। इसमें रेंज पुलिस ने 17 करोड़ 19 लाख को होल्ड पर रखवाया है। 2 जनवरी से अब तक हुए करीब 3 करोड़ का साइबर फ्रॉड मे से भी करीब 63 लाख को होल्ड पर रखवाया है। बीते साढ़े 12 माह में हुए करीब 141 करोड़ रुपए साइबर फ्रॉड की राशि मे से 17 करोड़ 82 लाख रुपए से ज्यादा राशि होल्ड करवाई है। आमजन को जागरुक कर रहे आईजी ओमप्रकाश ने बताया कि पुलिस प्रभावी तरीके से साइबर फ्रॉड के तहत आने वाले केसेज में कार्रवाई करती है। साथ ही एक्शन, इन्वेस्टिगेट कर मुलजिम पकड़ना तो है ही। साथ ही आमजन को साइबर फ्रॉड से सावधान रखने के लिए जागरूकता अभियान के तहत थाना स्तर पर अवेयरनेस कैंपेनिंग की जा रही है। उन्होंने अजमेर रेंज में 837 मोबाइल जो उक्त काम में लिए, उनमें से 497 के आईएमई नंबर ब्लॉक करवाए जा चुके हैं। वही 2 जनवरी से अब तक गुम हुए 364 मोबाइल में से 180 को रिकवर कर लिए गए 70 प्रतिशत से ज़्यादा रिकवरी हुई है। साइबर फ्रॉड के बाद क्या है राशि होल्ड करना : – साइबर अपराध से अपनी राशि को बचाने के लिए जितना जल्दी हो कंपलेन करवाना जरुरी है। ताकि साइबर पुलिस राशि को होल्ड कर सके है। टोंक एसपी विकास सांगवान ने बताया कि राशि होल्ड करने का मतलब यही है, किसी के साथ साइबर फ्रॉड है और उसने अपनी रिपोर्ट करवा दी तो साइबर पुलिस की टीम फ्रॉड के दौरान जिस खाते में राशि ट्रांसफर हुई है, उसे फ्रीज (लॉक) कर देते है। इसमें आरोपी उस राशि का उपयोग नहीं कर पाता है। अगर किसी के साथ साइबर फ्रॉड होता है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत करे या फिर जितना जल्दी हो सके ऑनलाइन https://cybercrime.g ov.in/ पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा।

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